UP: बिजनौर जिले में लगातार बढ़ रहे गुलदार यानी तेंदुए के आतंक के बीच ग्रामीणों ने अपनी और अपने पालतू पशुओं की सुरक्षा के लिए एक बेहद अनोखा और व्यावहारिक तरीका खोज निकाला है। यह मामला चांदपुर तहसील के थाना शिवाला कलां क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव सेला का है, जो कि चांदपुर वन रेंज के अंतर्गत आता है। इन दिनों इस क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही आम हो चुकी है, जिससे ग्रामीणों और उनके पालतू मवेशियों की जान पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है।
जंगली इलाकों और खेतों के पास बसे इस गांव में गुलदार अक्सर रात या दिन के समय पालतू कुत्तों को अपना आसान शिकार बनाते रहे हैं। गुलदार की मुख्य शिकार प्रवृत्ति यह होती है कि वह घात लगाकर हमला करता है और सीधे अपने शिकार की गर्दन को दबोचकर उसकी सांसें रोक देता है। इसी घातक खतरे से अपने वफादार श्वानों की रक्षा के लिए सेला गांव के ग्रामीणों ने एक नायाब देसी जुगाड़ तैयार किया है। इसके तहत कुत्तों के गले में बांधने के लिए एक विशेष पट्टा बनाया गया है, जिसमें चमड़े या मजबूत बेल्ट पर बड़ी संख्या में लंबी और नुकीली लोहे की कीलें मजबूती से लगाई गई हैं।
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जब इन पट्टों को कुत्तों के गले में बांध दिया जाता है, तो यह उनके लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करते हैं। यदि कोई गुलदार हमला करने के इरादे से कुत्ते की गर्दन को अपने जबड़े में दबोचने की कोशिश करेगा, तो ये नुकीली कीलें सीधे उसके मुंह और मसूड़ों में चुभ जाएंगी। इससे न केवल गुलदार के लिए कुत्ते की गर्दन पर शिकंजा कसना नामुमकिन हो जाएगा, बल्कि दर्द और चुभन के कारण वह हमला करने से पीछे हटने पर भी मजबूर हो जाएगा।
गांव सेला निवासी रणवीर, पुत्र समरपाल सिंह ने इस अनूठे सुरक्षा उपाय के बारे में पूरी जानकारी साझा करते हुए बताया कि उनके इलाके में गुलदार का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि पालतू जानवरों को बचाना मुश्किल हो रहा था। इसी मजबूरी और सुरक्षा की चाहत में यह नायाब तकनीक अपनाई गई है। क्षेत्र के लोगों का यह देसी जुगाड़ अब आसपास के गांवों में भी चर्चा का विषय बन गया है और लोग इसे वन्यजीवों के हमलों से बचने का एक बेहतरीन और कारगर उपाय मान रहे हैं।
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