उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को और सख्त करते हुए बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने 2 फरवरी 2026 (सोमवार) को शासनादेश जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 31 जनवरी 2026 तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति (31 दिसंबर 2025 तक अर्जित) का ब्योरा न अपलोड करने वाले 47816 राज्य कर्मचारियों का फरवरी में देय जनवरी का वेतन रोका जाएगा। साथ ही इनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
प्रदेश में कुल लगभग 8.66 लाख से 8.82 लाख राज्य कर्मचारी हैं। मुख्य सचिव के आदेश के मुताबिक, तय समयसीमा बीतने के बाद भी 47816 कर्मचारियों ने पोर्टल पर जानकारी नहीं दी। शासनादेश में विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने विभागों में ऐसे कर्मचारियों को चिह्नित करें और जांचें कि क्या इनका वेतन जारी हुआ है या नहीं। यदि संपत्ति ब्योरा न देने के बावजूद किसी का फरवरी में वेतन जारी किया गया है, तो आहरण वितरण अधिकारियों (DDO) की सूची एक सप्ताह में मांगी गई है और उन पर भी कार्रवाई होगी।
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के तहत अनिवार्य संपत्ति विवरण जमा करने के नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए है। मुख्य सचिव ने पहले ही कई बार याद दिलाया था कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए जरूरी है। जिन कर्मचारियों ने अब तक ब्योरा नहीं दिया, उन्हें जल्द पोर्टल पर अपलोड करना होगा, अन्यथा वेतन जारी नहीं होगा और आगे विभागीय जांच/दंड का सामना करना पड़ सकता है।
कुछ रिपोर्ट्स में कुल प्रभावित कर्मचारियों की संख्या 68,236 बताई गई है, लेकिन मुख्य शासनादेश और हालिया अपडेट में 47816 का आंकड़ा प्रमुखता से आया है (संभवतः अपडेटेड या विशिष्ट श्रेणी का)। सोशल मीडिया पर कर्मचारी संगठनों और लोगों में इसकी चर्चा है, जहां कुछ इसे “सख्त लेकिन जरूरी कदम” बता रहे हैं, जबकि अन्य वेतन रुकने से परेशानी जता रहे हैं।















































