बलिया: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बेटियों के हाथ पीले करने के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन बलिया में ‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’ विवादों के घेरे में है. मामला हैरान करने वाला है क्योंकि यहाँ सरकारी कागजों में जोड़ों की संख्या कुछ और है और मौके पर मौजूद अधिकारियों के पास आंकड़ा कुछ और. उससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि शादी सम्पन्न होने के बाद कई दुल्हनों की मांग सूनी दिखी। आखिर क्या है बलिया के इस आयोजन का सच?
मौका था मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह का. हिंदू रीति-रिवाज से शादियां संपन्न कराने का दावा किया गया. इस सामुहिक विवाह का साक्षी बने परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, राज्यसभा सांसद नीरज शेखर, डीएम मंगला प्रसाद सिंह समेत तमाम अधिकारी रहे. सूचना विभाग ने बड़े गर्व से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि 252 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ है. सरकारी खजाने से लाखों रुपये खर्च हुए.
सीआरओ त्रिभुवन ने बताया कि “जिलाधिकारी के कुशल पर्यवेक्षण में शादी कराई गई है. जो डेटा आया है उसमें लगभग 179 जोड़ों की शादी हुई है उनकी सामग्रियां भी वितरित हो गई हैं और प्रमाण पत्र भी वितरण किया गया.”
73 जोड़ों का अंतर है, वो जोड़े आखिर कहां गए?
अब सवाल ये है कि सरकारी विज्ञप्ति के 252 और अधिकारी के 179 के बीच जो 73 जोड़ों का अंतर है, वो जोड़े आखिर कहां गए? क्या 73 जोड़ों का पैसा सिर्फ कागजों में बांट दिया गया? या फिर सरकारी विभाग को खुद नहीं पता कि उनके आयोजन में कितने मेहमान आए थे?
बात सिर्फ आंकड़ों की नहीं, आस्था और परंपरा की भी है. हिंदू धर्म में बिना सिंदूर और मंगलसूत्र के विवाह पूर्ण नहीं माना जाता. लेकिन बलिया में कई दुल्हनों की मांग खाली दिखी. जब मीडिया ने सवाल किया, तो जवाब और भी हैरान करने वाले थे. किसी ने कहा कि वे सिर्फ ‘सगाई’ के लिए आए हैं, तो किसी ने कहा कि ‘शादी बाद में होगी.
हालांकि, जो जोड़े वहां मौजूद थे, वे सरकार से मिले उपहार पाकर खुश नजर आए. लेकिन योजना की पवित्रता पर उन 73 ‘गायब’ जोड़ों और ‘बिना सिंदूर’ वाली रस्मों ने सवाल खड़ा कर दिया.
अगर शादी की रस्में ही पूरी नहीं हुईं, तो क्या इसे वाकई ‘विवाह’ माना जाएगा?
बलिया का यह मामला भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है या फिर प्रशासनिक लापरवाही की ओर? अगर शादी की रस्में ही पूरी नहीं हुईं, तो क्या इसे वाकई ‘विवाह’ माना जाएगा? अब देखना ये है कि क्या शासन इन ‘लापता’ 73 जोड़ों और कागजी खानापूर्ति की जांच कराता है या फिर फाइलों में सब ‘ऑल इज वेल’ दिखाकर रफा-दफा कर दिया जाएगा
INPUT-ANANYA MISHRA







































