वाराणसी: कफ सिरप तस्करी के बड़े सिंडिकेट में नया खुलासा शुभम जायसवाल का करीबी मनोज यादव और बेटा लक्ष्य गिरफ्तार, करोड़ों की संपत्ति बनाई

वाराणसी की कोतवाली पुलिस ने नशीले कफ सिरप की तस्करी के एक बड़े सिंडिकेट के प्रमुख सदस्य मनोज यादव और उसके बेटे लक्ष्य यादव को गिरफ्तार कर लिया है। मनोज यादव मुख्य सरगना शुभम जायसवाल का सबसे करीबी सहयोगी माना जाता है। पुलिस के अनुसार मनोज हवाला नेटवर्क चलाता था और बोगस फर्मों के जरिए काले धन को सफेद करने का काम करता था। दोनों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने करोड़ों रुपये की संपत्ति का भी पता लगाया है। यह मामला उत्तर प्रदेश में पिछले एक साल से चल रहे बड़े पैमाने पर कोडीन बेस्ड कफ सिरप तस्करी रैकेट की जांच में नया मोड़ लाया है।

गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई

कोतवाली पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए मनोज यादव (उम्र 48) और उसके बेटे लक्ष्य यादव (उम्र 22) को वाराणसी के अलग-अलग ठिकानों से गिरफ्तार किया। दोनों से पूछताछ में पता चला कि वे शुभम जायसवाल के लिए हवाला का मुख्य नोड थे। मनोज ने कई बोगस फर्में बनाई थीं, जिनके जरिए तस्करी से आए करोड़ों रुपये को वैध दिखाया जाता था। पुलिस ने दोनों के घरों से डिजिटल सबूत, मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक पासबुक और कई दस्तावेज जब्त किए हैं।

करोड़ों की संपत्ति का खुलासा

पुलिस जांच में सामने आया है कि मनोज यादव ने पिछले 4-5 सालों में तस्करी से आए धन से वाराणसी, आजमगढ़ और लखनऊ में कई मकान, दुकानें, जमीन और लग्जरी गाड़ियां खरीदी हैं। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक उनकी संपत्ति का मूल्य 8-10 करोड़ रुपये से अधिक है। पुलिस ने इन संपत्तियों पर अस्थायी रूप से कुर्की लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच में यह भी पता चला है कि लक्ष्य यादव पिता के साथ मिलकर हवाला ट्रांजेक्शन और फर्जी बिलिंग का काम संभालता था।

शुभम जायसवाल से सीधा कनेक्शन

पुलिस के मुताबिक मनोज यादव शुभम जायसवाल का सबसे भरोसेमंद व्यक्ति था। शुभम जायसवाल पहले ही गिरफ्तार हो चुका है और फिलहाल जेल में है। पूछताछ में मनोज ने कबूल किया कि वह शुभम के लिए धन का इंतजाम करता था, हवाला चैनल चलाता था और तस्करी से आए पैसे को कई बैंकों और फर्मों में घुमाकर सफेद करता था। पुलिस का कहना है कि मनोज के फोन और लैपटॉप से कई ऐसे ट्रांजेक्शन और चैट मिले हैं जो शुभम जायसवाल से सीधे जुड़े हैं।

तस्करी का पूरा नेटवर्क

पुलिस के अनुसार यह सिंडिकेट उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान तक फैला हुआ था। कोडीन बेस्ड कफ सिरप को फर्जी बिल और लाइसेंस के जरिए खरीदा जाता था और फिर विदेशों (खासकर अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया) में तस्करी की जाती थी। पुलिस ने अब तक इस रैकेट से जुड़े 18 लोगों को गिरफ्तार किया है और करोड़ों के सिरप बरामद किए हैं। मनोज यादव की गिरफ्तारी से नेटवर्क की कमर टूटने की उम्मीद जताई जा रही है।

सामाजिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया

गिरफ्तारी के बाद वाराणसी में नशीले कफ सिरप तस्करी को लेकर लोगों में आक्रोश है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि युवाओं की तबाही का यह खेल कई सालों से चल रहा था। पुलिस ने कहा कि जांच जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां होंगी। एसपी वाराणसी ने बताया कि मनोज यादव और लक्ष्य से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि पूरा नेटवर्क और विदेशी कनेक्शन सामने आए।

INPUT-ANANYA MISHRA

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