‘हम बेघर हो जाएंगे…’, बहराइच में सरकारी जमीन की जांच करने पहुंची एसडीएम मोनालिसा के पैरों में गिर पड़ीं दर्जनों महिलाएं, फूट-फूटकर रोईं

बहराइच: नानपारा (Bahraich Naanpara) में सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान भावुक मंजर देखने को मिला। एसडीएम मोनालिसा जौहरी जब पाठक पुरवा गांव में राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार सरकारी भूमि का निरीक्षण करने पहुंचीं, तो इलाके की दर्जनों महिलाएं उनके पैरों में गिर पड़ीं। महिलाएं जोर-जोर से फूट-फूटकर रोने लगीं और गिड़गिड़ाते हुए बोलीं कि यदि अतिक्रमण हटाया गया तो वे बेघर हो जाएंगी और उनके पास जाने की कोई जगह नहीं बचेगी। यह दृश्य इतना भावुक था कि मौके पर मौजूद लोग भी प्रभावित हुए। एसडीएम ने स्थिति को संभालने की कोशिश की लेकिन महिलाओं का रो-रोकर अपील करना जारी रहा।

यह घटना सरकारी जमीन को वन विभाग को पौधरोपण के लिए सौंपने की प्रक्रिया से जुड़ी है। एसडीएम मोनालिसा जौहरी ने स्पष्ट किया कि जिस भूमि का निरीक्षण किया गया, वह राजस्व रिकॉर्ड में पूरी तरह सरकारी भूमि दर्ज है। वन विभाग ने इस भूमि पर पौधरोपण के उद्देश्य से दावा किया था और लगभग 74 हेक्टेयर जमीन की मांग की गई थी। प्रशासन की ओर से कहा गया कि यह भूमि अवैध रूप से कब्जाई गई है और इसे मूल रूप से वापस सरकारी उपयोग में लाया जाएगा। हालांकि महिलाओं का कहना था कि वे दशकों से यहां रह रही हैं और उनके परिवारों का कोई वैकल्पिक ठिकाना नहीं है।

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एसडीएम मोनालिसा जौहरी ने हाल के महीनों में बहराइच जिले में अवैध अतिक्रमण हटाने की कई कार्रवाइयां की हैं। नानपारा क्षेत्र में उनकी ताबड़तोड़ कार्यवाही जारी है, जिसमें जेसीबी से पक्के निर्माण ध्वस्त किए जा चुके हैं। प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर कोई भी कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यदि कोई प्रयास हुआ तो मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इस घटना में महिलाओं के रोने और पैरों में गिरने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे प्रशासन की कार्रवाई पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे सरकारी संपत्ति की रक्षा बताते हैं, जबकि अन्य गरीब परिवारों की मजबूरी पर सहानुभूति जता रहे हैं।

प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया है और आगे की कार्रवाई राजस्व रिकॉर्ड और नियमों के अनुसार करने का भरोसा दिया है। एसडीएम ने कहा कि निरीक्षण के दौरान कोई जबरन कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि सिर्फ जांच की गई है। महिलाओं की अपील पर प्रशासन ने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन अंतिम फैसला भूमि के कानूनी दर्जे पर आधारित होगा। यह मामला उत्तर प्रदेश में अवैध अतिक्रमण हटाने की मुहिम का हिस्सा लगता है, जहां योगी सरकार सख्ती बरत रही है।

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