पश्चिम एशिया संकट, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से की बातचीत, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता पर बनी सहमति

पश्चिम एशिया में जारी संकट (US-ईरान-इजरायल युद्ध) के बीच भारत ने कूटनीतिक सक्रियता बढ़ाई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 10 मार्च 2026 को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर विस्तृत बातचीत की, जो संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों के बीच तीसरी ऐसी बातचीत है। चर्चा में क्षेत्रीय स्थिति, ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल निर्यात की निरंतरता पर फोकस रहा। दोनों पक्षों ने निकट संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। यह बातचीत ईरान में नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति के बाद पहली उच्च स्तरीय संपर्क है, जहां अमेरिका-इजरायल हमलों से ईरान की नेतृत्व व्यवस्था प्रभावित हुई है। भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

बातचीत का विवरण

जयशंकर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री से “विस्तृत बातचीत” की और नवीनतम घटनाक्रम पर चर्चा हुई। दोनों ने सहमति जताई कि संपर्क जारी रखा जाएगा। यह बातचीत 28 फरवरी (संघर्ष शुरू होने के बाद पहली) और 5 मार्च के बाद तीसरी है। चर्चा में होर्मुज जलडमरूमध्य के वर्चुअल ब्लॉकेड से तेल और एलएनजी आपूर्ति पर असर, वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई गई। ईरान ने भारत की सहायता (जैसे IRIS लावन जहाज को कोच्चि में डॉकिंग की अनुमति) की सराहना की। जयशंकर ने संसद में कहा कि भारत ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव कूटनीतिक प्रयास कर रहा है, क्योंकि पश्चिम एशिया भारत के तेल और गैस आयात का प्रमुख स्रोत है।

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ऊर्जा आपूर्ति पर सहमति और प्रभाव

बातचीत में दोनों पक्षों ने ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करने पर सहमति जताई। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (जो वैश्विक तेल का 20% गुजरता है) से निर्यात प्रभावित होने की स्थिति में भारत को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया। भारत ने क्षेत्रीय स्थिरता और डिप्लोमेसी पर जोर दिया ताकि आपूर्ति चेन बनी रहे। वैश्विक तेल कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं और होर्मुज ब्लॉकेड से भारत में तेल-गैस कीमतें और महंगी हो सकती हैं। जयशंकर ने कहा कि भारतीय उपभोक्ता की हित सर्वोपरि है और सरकार आपूर्ति, लागत और जोखिमों को ध्यान में रखकर कदम उठा रही है।

कूटनीतिक संदर्भ और आगे की संभावनाएं

यह बातचीत भारत की पश्चिम एशिया कूटनीति का हिस्सा है जहां वह अमेरिका, इजरायल, ईरान और खाड़ी देशों से संतुलित संपर्क बनाए रख रहा है। जयशंकर ने जर्मनी और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रियों से भी बात की। भारत ने ईरानी जहाजों को बंदरगाह देने और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर फोकस किया है। यदि संकट लंबा चला तो भारत वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत (रूस, सऊदी, यूएई) पर निर्भर बढ़ा सकता है।

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