पिछड़ा वर्ग आयोग क्या है और क्यों टल सकते हैं यूपी के पंचायत चुनाव?

उत्तर प्रदेश में अप्रैल-मई 2026 में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तारीखों पर अभी भी संशय बना हुआ है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बार-बार कहा है कि चुनाव अपने समय पर होंगे, लेकिन विपक्ष और कई विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव टल सकते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (उत्तर प्रदेश राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग) का गठन न होना। यह आयोग पिछले साल दिसंबर में ही खत्म हो चुका है और अभी तक नए सिरे से गठित नहीं किया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई के दौरान योगी सरकार ने स्पष्ट वादा किया है कि पंचायत चुनाव से पहले आयोग का गठन किया जाएगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही OBC आरक्षण की सूची तैयार होगी और चुनाव होंगे।

पिछड़ा वर्ग आयोग क्या है?

उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जो 1996 के उत्तर प्रदेश राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम के तहत गठित की गई थी। इसका मुख्य काम सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (OBC) की पहचान करना, उनकी सूची तैयार करना, उसमें बदलाव या नए समावेश की सिफारिश करना और आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सरकार को सलाह देना है।

यह आयोग उन जातियों और समुदायों की देखभाल करता है जो अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल नहीं हैं, लेकिन सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। आयोग शिकायतें सुनता है, सर्वे करता है और तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करता है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों (जैसे इंदिरा साहनी केस और बाद के निर्देशों) के अनुसार, स्थानीय निकाय चुनावों (पंचायत, नगर पालिका आदि) में OBC आरक्षण देने के लिए राज्य स्तर पर एक ऐसा आयोग होना अनिवार्य है, जो तथ्यपरक और वैज्ञानिक आधार पर आरक्षण की सिफारिश करे। बिना आयोग के रिपोर्ट के OBC आरक्षण वैध नहीं माना जाता।

पंचायत चुनाव से आयोग का सीधा संबंध

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों (ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य) में OBC के लिए 27% आरक्षण का प्रावधान है। यह आरक्षण तय करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट जरूरी है। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही जाति-आधारित आरक्षण वाली सीटों की सूची तैयार की जाती है। चूंकि आयोग का कार्यकाल दिसंबर 2025 में खत्म हो चुका है और नया गठन नहीं हुआ, इसलिए आरक्षण की प्रक्रिया रुकी हुई है।

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हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें मांग की गई थी कि आयोग का तत्काल गठन किया जाए। सुनवाई के दौरान सरकार ने हलफनामा दाखिल कर वादा किया कि पंचायत चुनाव से पहले आयोग का गठन किया जाएगा। कोर्ट ने इस वादे को गंभीरता से लिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय की है।

चुनाव टलने की संभावना क्यों?

विपक्ष का कहना है कि बिना आयोग की रिपोर्ट के OBC आरक्षण लागू नहीं हो सकता। अगर आयोग का गठन समय पर नहीं हुआ या रिपोर्ट तैयार नहीं हुई, तो चुनाव टालना पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार बिना वैध आरक्षण सूची के चुनाव नहीं हो सकते। इसलिए अगर आयोग की रिपोर्ट अप्रैल-मई तक नहीं आती, तो चुनाव टलने की संभावना मजबूत हो जाती है।

सरकार का पक्ष

पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि चुनाव समय पर होंगे। सरकार का दावा है कि आयोग का गठन प्रक्रिया में है और जल्द ही सदस्यों की नियुक्ति हो जाएगी। लेकिन हाईकोर्ट के दबाव और विपक्ष के सवालों के बीच समय कम रह गया है।

INPUT-ANANYA MISHRA

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