UP Panchayat Election 2026: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश ग्राम पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग से विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत ने पूछा है कि क्या पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक नियमों के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता।
संवैधानिक प्रावधान का हवाला
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अनुच्छेद 243-E का उल्लेख किया, जिसमें पंचायतों का कार्यकाल पहली बैठक से पांच वर्ष निर्धारित है। उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों की पहली बैठक 27 मई 2021 को हुई थी, जिसके अनुसार इनका कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। अदालत ने कहा कि इस समयसीमा का पालन अनिवार्य है।
मतदाता सूची में देरी पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीखों में बार-बार बदलाव किया गया है। पहले यह प्रक्रिया दिसंबर 2025 तक पूरी होनी थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 15 अप्रैल 2026 कर दिया गया है। इससे आशंका जताई जा रही है कि आरक्षण प्रक्रिया में लगने वाला समय चुनाव कार्यक्रम को प्रभावित कर सकता है।
सरकार का दावा और जमीनी तैयारियां तेज
दूसरी ओर, राज्य के पंचायती राज मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि चुनाव समय पर ही कराए जाएंगे। प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां भी तेज हो गई हैं। विभिन्न जिलों में मतपत्रों की छपाई तेजी से हो रही है और कई जगह इन्हें पहुंचाया भी जा चुका है। साथ ही मतदान केंद्रों के निर्धारण और बैलेट बॉक्स की व्यवस्था का काम भी आगे बढ़ रहा है।
अदालत ने मांगा विस्तृत हलफनामा
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। आयोग से पूछा गया है कि क्या 15 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद 26 मई 2026 तक मतदान और मतगणना पूरी कराना संभव है। अदालत ने 25 मार्च 2026 तक इस पर विस्तृत जानकारी देने को कहा है और महाधिवक्ता या अपर महाधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।















































