UP: उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने समाजवादी पार्टी द्वारा उठाए गए सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में वोटरों के पते से जुड़ी गड़बड़ियां कोई नई या विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से उत्पन्न समस्या नहीं हैं। आयोग के अनुसार ऐसी त्रुटियां दशकों से मतदाता सूचियों में चली आ रही हैं और एसआईआर के दौरान मतदाताओं के विवरण में कोई संशोधन नहीं किया गया है।
वोटर लिस्ट में विभिन्न असंबंधित व्यक्तियों के नामों के सामने मकान नंबर एक जैसा आ जाना एक बहुत आम सी गलती है जो सारी विधानसभाओं के बहुत सारे मतदान केंद्रों कि वोटरलिस्टों में विद्यमान् है। यह असंतोषजनक स्थिति SIR की वजह से उत्पन्न नहीं हुई है क्योंकि SIR के गणना चरण में वोटर लिस्ट… https://t.co/LBrA6shw8i
— CEO Uttar Pradesh (@ceoup) January 15, 2026
एक जैसे मकान नंबर होना आम समस्या
आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि वोटर लिस्ट में विभिन्न असंबंधित व्यक्तियों के नामों के सामने मकान नंबर एक जैसा आ जाना एक बहुत आम सी गलती है। यह स्थिति गांवों और शहरों दोनों में देखने को मिलती है, जहां कई मकानों का कोई आधिकारिक नंबर नहीं होता। ऐसे में गांवों में काल्पनिक (नोशनल) नंबर और शहरों में 0 या 00 जैसे नंबर लिखना आम प्रचलन है।
रामपुर के मामले से स्थिति स्पष्ट
आयोग ने रामपुर जिले के मिलक नगर पालिका क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां दो अलग-अलग वार्डों में रहने वाले परिवारों के मकान नंबर नगरपालिका रजिस्टर में एक जैसे दर्ज थे। विधानसभा की मतदाता सूची में वार्ड नंबर का उल्लेख न होने के कारण दोनों परिवारों के वोट एक ही बूथ पर और समान मकान नंबर के साथ दर्ज हो गए, जिससे भ्रम की स्थिति बनी।
अनुभागों के सही विभाजन की कमी बनी कारण
निर्वाचन आयोग के अनुसार मतदाता सूची के भागों को पर्याप्त और स्पष्ट अनुभागों में विभाजित न किया जाना भी इस विसंगति का एक बड़ा कारण है। यदि प्रत्येक मतदान क्षेत्र में ठीक तरह से अनुभाग बनाए गए होते और उनमें वार्ड या मोहल्ले का उल्लेख होता, तो इस प्रकार की त्रुटियों से बचा जा सकता था।
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त्रुटि सुधार के लिए बीएलओ को निर्देश
आयोग ने बताया कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों और बीएलओ को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब मतदाता सूची में मकान नंबर के साथ गली, मोहल्ला या सड़क का नाम दर्ज किया जाएगा। बीएलओ सुपरवाइजरों को भी यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अंतिम सूची के प्रकाशन से पहले ऐसी सभी गलतियों की पहचान कर उन्हें दुरुस्त कराएं।
















































