प्रत्येक मूल्यांकनकर्ता को अधिकतम 15 से 25 विद्यालयों की जिम्मेदारी
लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के विद्यालयों को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण-अनुकूल शिक्षण परिवेश के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग (SHVR) 2026-27 के अंतर्गत प्रदेश के 1,88,301 विद्यालयों ने स्व-मूल्यांकन सर्वेक्षण पूरा कर पोर्टल पर जमा किया है। इनमें 1,74,754 विद्यालयों ने तीन स्टार या उससे अधिक की रेटिंग प्राप्त की है। अब दूसरे चरण में विद्यालयों की व्यवस्थाओं का भौतिक सत्यापन किया जाएगा, जिसे 31 अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
विद्यालयों में स्वच्छता, स्वास्थ्यकर वातावरण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित एसएचवीआर (SHVR) के अंतर्गत मूल्यांकन की प्रक्रिया दो चरणों में निर्धारित है। पहले चरण में विद्यालयों ने निर्धारित प्रश्नावली के आधार पर अपनी व्यवस्थाओं का स्व-मूल्यांकन किया। अब दूसरे चरण में इस विवरण का जमीनी स्तर पर सत्यापन किया जाएगा, जिससे पोर्टल पर दर्ज सूचनाओं और विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का मिलान हो सके।
ज्ञात हो कि प्रदेश के 1,88,301 विद्यालयों का स्वमूल्यांकन पूरा होना इस अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब 31 अक्टूबर तक सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद विद्यालयों में स्वच्छता और हरित परिवेश से संबंधित व्यवस्थाओं का अधिक विश्वसनीय आकलन सामने आएगा। राज्य सरकार की विद्यालयी परिवेश को बेहतर बनाने की प्राथमिकताओं के अनुरूप यह पहल स्वच्छता, पर्यावरणीय चेतना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण को प्रोत्साहित करने में सहायक होगी।
जिलास्तरीय समितियों की निगरानी में होगा सत्यापन
दूसरे चरण की प्रक्रिया को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार जिलास्तर पर मूल्यांकन समितियों के माध्यम से सत्यापन कार्य की निगरानी की जाएगी। समिति की अध्यक्षता जिलाधिकारी अथवा उनके नामित अधिकारी द्वारा की जाएगी। इसमें शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ जलापूर्ति, स्वास्थ्य और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप विशेषज्ञों एवं नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की सहभागिता का प्रावधान है। इस व्यवस्था के माध्यम से विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं और स्व-मूल्यांकन में दर्ज विवरण की जांच की जाएगी। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में सहायता मिलेगी।
विभिन्न विभागों के पात्र कार्मिक बनेंगे मूल्यांकनकर्ता
सत्यापन कार्य के लिए डायट (DIET) प्रशिक्षुओं, अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP), स्टेट रिसोर्स ग्रुप (SRG), शिक्षक संकुल और संबंधित विभागों के पात्र मैदानी कार्मिकों की सेवाएं ली जा सकती हैं। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार पंचायती राज, राजस्व, मनरेगा, बाल विकास एवं पुष्टाहार और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े पात्र कार्मिकों तथा स्वयंसेवकों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है। मूल्यांकनकर्ताओं को एसएचवीआर प्रश्नावली की जानकारी होना आवश्यक है। इसके साथ एंड्रॉयड मोबाइल फोन, सक्रिय मोबाइल नंबर और ई-मेल जैसी आवश्यक शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। कार्य को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने के लिए प्रत्येक मूल्यांकनकर्ता को अधिकतम 15 से 25 विद्यालय आवंटित किए जाने का प्रावधान है। विद्यालयों की भौगोलिक निकटता और क्लस्टर को प्राथमिकता देकर सत्यापन प्रक्रिया को सुचारु बनाने पर जोर दिया गया है।
बेहतर विद्यालयी परिवेश के आकलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग का उद्देश्य विद्यालयों में स्वच्छता, स्वास्थ्यकर वातावरण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित करना है। दूसरे चरण का भौतिक सत्यापन इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इससे विद्यालयों की व्यवस्थाओं का आकलन वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर किया जा सकेगा।
स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग के माध्यम से प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता, स्वास्थ्यकर वातावरण और पर्यावरणीय चेतना को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दूसरे चरण में भौतिक सत्यापन से विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का आकलन होगा और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनेगी।
— मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश














