आँखे तरसती रही उनको पाने की तलाश में, लेकिन हाथ लगी सिर्फ मायूसी

 

 

ग्रेटर नोएडा वेस्ट के शाहबेरी गांव में जमींदोज हुई छह मंजिला इमारत चंद सेकेंडों में भरभराकर गिर गई। इमारत गिरने से दस मिनट पहले ही एक कलाकर दंपती भवन के मैदानी तल से होकर गुजरे थे। उस समय रात के करीब नौ बजे थे। असम के रहने वाले मिंटू डेका व उनकी पत्नी शिखा गुप्ता ने कभी न भूलने वाले मंजर को बयां करते हुए दैनिक जागरण को बताया कि भवन के मैदानी तल पर करीब आठ-दस मजदूर खाना बना रहे थे। सभी लोग खुश नजर आ रहे थे। हंसते हुए आपस में बात कर रहे थे। सब्जी बनने की खुशबू आ रही थी। उन्हें हंसते-मुस्कुराते देखकर लगा ही नहीं कि चंद मिनटों बाद उनके ऊपर आफत आने वाली है। ऊपरी मंजिल के दो फ्लैटों में लाइट जली हुई थी।

 

 

दंपती चंद कदम दूरी पर अपने घर में घुसे ही थे कि इमारत गिरने का तेज धमाका हुआ। आसपास की इमारत और मकान हिल गए। लोगों को लगा भूकंप आ गया। डर से लोग घरों से बाहर आ गए। लोगों ने अपनी आंखों के सामने इमारत को गिरते देखा। मिंटू डेका व शिखा ने बताया कि वे घर से बाहर निकले तो पांच मंजिल तक के फ्लैट जमींदोज हो चुके थे और छठवीं मंजिल के फ्लैट भरभराकर गिर रहे थे। फ्लैट इतनी तेजी से जमींदोज हुए कि मैदानी तल पर खाना बना रहे मजदूरों को बाहर निकलने का मौका भी नहीं मिला। सभी लोग इधर-उधर चीखते-चिल्लाते दौड़ रहे थे। मिंटू डेका ने ही सबसे पहले पुलिस को 100 नंबर पर फोन किया था।

 

 

हादसे की जानकारी मिलने पर पहुंचे परिचित व रिश्तेदार मलवे में अपनों को तलाशते दिखे। साथ ही वे लोग भी पहुंचे जिन्होंने इन इमारतों में आशियाना बनाने के लिए बिल्डर को जीवन भर की कमाई सौंप दी है। इमारत को धराशायी देख उनका रो-रोकर बुरा हाल था। इमारत में फ्लैट लेने वाले एक पीड़ित ने बताया कि बिल्डर ने निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कब्जा देना शुरू कर दिया था। एक इमारत में 20 फ्लैट बने थे। सभी फ्लैटों की बुकिंग भी हो चुकी थी। कब्जा मिलने के बाद कुछ परिवारों ने यहां रहना शुरू कर दिया। वहीं कुछ लोग जल्द ही शिफ्ट होने की तैयारी में थे। इन परिवार में शामिल दीपिका कंबोज को जैसे ही बिंल्डिग के धराशायी होने की जानकारी मिली, वह तुरंत घटना स्थल पर पहुंच गईं। दीपिका ने बताया कि शुक्रवार को गृह प्रवेश की योजना थी। परिवार मयूर विहार में किराये के मकान में रहता है। फ्लैट खरीदने के लिए उन्होंने सारी जमा पूंजी लगा दी थी।

 

 

दो इमारतों के गिरने से जहां स्थानीय लोगों में रोष दिखा। वहीं गांव के लोग बचाव दल का सहयोग करने को भी आतुर दिखे। घटनास्थल पर लोगों का जन सैलाब पूरे दिन उमड़ा रहा। ग्रामीणों ने मलबा हटाने में सहयोग करने की अपील भी आलाधिकारियों से की। लेकिन अधिकारियों ने प्रशिक्षित न होने का हवाला देकर ग्रामीणों को पीछे हटा दिया। इसके बाद ग्रामीण केवल मूकदर्शक बने खड़े रहे। यदि बचाव दस्ते का बीच-बीच में काम रुकता तो मलबे के नीचे दबे लोगों की जिंदगी की आस लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती।

 

देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करेंआप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )