जब लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की तरफ से नरेन्द्र मोदी सरकार के खिलाफ शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव की इजाजत देने का फैसला किया तो इस फैसले ने कई लोगों को हैरानी में डाल दिया है. एक तरफ जहां अधिकतर नेता यह मानकर चल रहे थे कि बजट सेशन की तरह ही दोबारा लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन विश्वासमत की इजाजत नहीं देगी और उसके बाद सदन में कोई भी काम नहीं हो पाएगा.
लेकिन इस मुद्दे पर सरकार के रणनीतिकार ने कुछ और ही रणनीति अपनाई थी. अंग्रेजी न्यूज़ चैनल हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक सत्ताधारी पार्टी के सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पहले दिन ही अविश्वास प्रस्ताव की चुनौती को स्वीकार कर विपक्षियों को हैरान कर देना चाहते थे.
मोदी सरकार के एक मंत्री ने बताया- “हम ऐसा मानते हैं कि अविश्वास प्रस्ताव के आने के बाद विपक्षी दलों के पास सदन को नहीं चलने देने का कोई मुद्दा नहीं रह जाएगा.” सूत्रों ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव को फौरन लाया जाए ताकि मानसून सेशन के बाकी दिनों में महत्वपूर्ण बिलों को पास कराया जा सके.
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने एनडीए से अलग होने वाली तेलगूदेशम पार्टी (टीडीपी) के सांसद के. श्रीनिवासन के अविश्वास प्रस्ताव को नोटिस को स्वीकार किया. इस प्रस्ताव में यह कहा गया है कि मंत्रिपरिषद में सदन ने अविश्वास जाहिर की है.
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मांग की कि उनकी पार्टी विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है. लिहाजा उन्हें अविश्वास प्रस्ताव पेश करने की इजाजत दी जाए. लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ने पहले पेश करने वाले के नियमों का हवाला देते हुए कांग्रेस की इस मांग को अस्वीकार कर दिया और कहा कि इस मामले में पहले टीडीपी ने अविश्वास प्रस्ताव रखा है. इसलिए उसे ही यह पेश करने की अनुमति मिलेगी.












































