राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने स्वतंत्रता सेनानी वीर विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सावरकर का जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग और स्वतंत्रता संग्राम के लिए समर्पित रहा है। ऐसे महान व्यक्तित्व को सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान करना देश के इतिहास और राष्ट्रभावना के प्रति सम्मान प्रकट करने जैसा होगा।
भारत रत्न की गरिमा पर जोर
डॉ. भागवत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि वीर सावरकर को भारत रत्न से सम्मानित किया जाता है, तो इससे पुरस्कार की प्रतिष्ठा बढ़ जाएगी। उनका मानना है कि सावरकर ने राष्ट्रहित में जो योगदान दिया, वह अद्वितीय है और उसे उचित मान्यता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सावरकर को सम्मान देना केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली परंपरा को सम्मान देना होगा।
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समान नागरिक संहिता पर संतुलित रुख
इस अवसर पर सरसंघचालक ने समान नागरिक संहिता (UCC) के विषय में भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि UCC का उद्देश्य समाज में एकरूपता और समानता लाना है, लेकिन इसकी प्रक्रिया बेहद संवेदनशील होनी चाहिए। सभी समुदायों और वर्गों को साथ लेकर चलना आवश्यक है, ताकि किसी प्रकार का अविश्वास या सामाजिक तनाव उत्पन्न न हो।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज
डॉ. मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग और UCC को लेकर बहस लगातार जारी है। उनके इस विचार को राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में गंभीरता से लिया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यह बयान न केवल ऐतिहासिक योगदान को लेकर बहस को नया आयाम देता है, बल्कि सामाजिक समरसता पर भी जोर देता है।

















































