सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Senger) को बड़ा झटका दिया है। उनके खिलाफ उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में सजा निलंबन और जमानत की मांग वाली याचिका पर अदालत ने कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि यह मामला पहले से दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है और वहीं इसका निपटारा होना चाहिए।
जेल में ही रहेंगे सेंगर
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट को इस मामले में लंबित अपील तीन महीने के भीतर निपटानी चाहिए। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट को यथासंभव जल्दी सुनवाई करनी चाहिए ताकि मामले में अनिश्चितता खत्म हो। इस आदेश के साथ ही सेंगर फिलहाल जेल में ही रहेंगे और उनकी जमानत की उम्मीद टल गई है।
मामले का ऐतिहासिक संदर्भ
कुलदीप सेंगर को 2018 में उन्नाव में नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के आरोप में दोषी ठहराया गया था। 2019 में पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हुई थी, जिसमें सेंगर पर हत्या का भी आरोप लगा और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। दोनों मामलों में सेंगर ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की है।
पीड़ित परिवार और सामाजिक प्रतिक्रिया
उन्नाव पीड़िता के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस फैसले की सराहना की जा रही है और इसे महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति सख्ती का संकेत माना जा रहा है। सेंगर के समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में पेश कर रहे हैं।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
अब दिल्ली हाईकोर्ट में सेंगर की अपील की सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश अनुसार, हाईकोर्ट को तीन महीने के भीतर निर्णय करना है। यदि हाईकोर्ट में सजा बरकरार रहती है, तो सेंगर के लिए राहत की संभावनाएं कम हो जाएंगी। इसके विपरीत, अगर कोई राहत मिलती है तो वह पुनः सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं। फिलहाल, यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने का संकेत है।

















































