UP: उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत आज राज्यपाल के अभिभाषण से हुई, लेकिन बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती (Mayawati) ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अपने आधिकारिक X हैंडल पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा कि अभिभाषण संसदीय परंपरा के अनुसार शुरू हुआ, लेकिन यदि यह प्रदेश के विकास, सर्वसमाज के उत्थान और व्यापक जनहित में अधिक वास्तविक, ठोस और थोड़ा उत्साही होता तो बेहतर होता। मायावती ने इसे सरकार की कमियों पर पर्दा डालने वाला बताया और कई गंभीर मुद्दों पर राज्यपाल द्वारा सरकार का ध्यान आकर्षित न करने पर सवाल उठाए।
प्रदेश की जनता में व्याप्त चिंता और असुरक्षा पर चुप्पी
उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र आज माननीया राज्यपाल द्वारा विधानमण्डल के संयुक्त अधिवेशन को सम्बोधन की संसदीय परम्परा से शुरू हुआ, किन्तु उनका यह भाषण परम्परा से हटकर प्रदेश के विकास व सर्वसमाज के उत्थान सहित व्यापक जनहित में वास्तविक व थोड़ा उत्साही होता तो यह बेहतर होता।…
— Mayawati (@Mayawati) February 9, 2026
मायावती ने अपनी पोस्ट में लिखा कि पूरे उत्तर प्रदेश में सर्वसमाज के करोड़ों लोग सरकार की गलत नीतियों और कार्यकलापों से दुखी व त्रस्त हैं। गरीबी, बेरोजगारी और पारिवारिक कठिनाइयों के अलावा सबसे बड़ी चिंता लोगों में अपनी जान, माल और मजहब की सुरक्षा को लेकर है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को इन मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहिए था, ताकि जनता के साथ-साथ विपक्ष को भी कुछ आश्वासन मिलता। इस कमी के कारण ही अभिभाषण के दौरान विपक्ष की नारेबाजी और हंगामा जारी रहा। मायावती ने इसे जनता की असुरक्षा और असंतोष का स्पष्ट संकेत बताया।
सरकारी दावों और वादों पर विवरण की कमी
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अभिभाषण में भाजपा सरकार द्वारा जनहित और जनकल्याण से जुड़े बड़े-बड़े दावों, आश्वासनों, घोषणाओं और वादों को पूरा करने के ठोस विवरण के अभाव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह कमी लोगों की चिंता का प्रमुख कारण बनी है। मायावती ने सुझाव दिया कि आगामी बजट भाषण में इन वादों के क्रियान्वयन और प्रगति का स्पष्ट समायोजन किया जाना चाहिए, ताकि जनता को वास्तविक विश्वास मिल सके। उन्होंने इसे सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बताया।
विपक्ष की नारेबाजी और हंगामा
मायावती ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्यपाल के संबोधन में जनता की वास्तविक समस्याओं पर गंभीरता का अभाव था, जिसके चलते विपक्ष ने नारेबाजी और हंगामा किया। उन्होंने इसे स्वाभाविक प्रतिक्रिया करार दिया और कहा कि यदि अभिभाषण में जनहित के ज्वलंत मुद्दों पर ठोस बात होती तो सदन में शांति बनी रह सकती थी। यह टिप्पणी बजट सत्र के पहले दिन की राजनीतिक बहस को और तेज करने वाली साबित हो रही है।
मायावती की सक्रियता और सोशल मीडिया पर प्रभाव
मायावती का यह पोस्ट उनके आधिकारिक हैंडल पर सुबह जारी किया गया, जिसमें उन्होंने विस्तार से अपनी चिंताएं और सुझाव रखे। यह उनकी ओर से बजट सत्र पर पहली प्रमुख प्रतिक्रिया है, जो विपक्षी दलों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। मायावती अक्सर ऐसे मौकों पर प्रेस नोट्स और ट्वीट्स के जरिए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाती हैं, और यह पोस्ट भी उसी कड़ी का हिस्सा है। प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में अब बजट भाषण पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां मायावती के सुझावों का असर दिख सकता है।

















































