दिल्ली पुलिस ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (General Manoj mukund Naravane) की अप्रकाशित आत्मकथा ‘Four Stars of Destiny’ के ऑनलाइन लीक होने पर गंभीर संज्ञान लिया है। पुस्तक के कुछ हिस्से सोशल मीडिया और विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गए हैं, जबकि किताब अभी तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि लीक हुए कंटेंट में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां हो सकती हैं, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जा रहा है।
पुस्तक में क्या है खास?
‘Four Stars of Destiny’ जनरल नरवणे की आत्मकथा है, जिसमें उन्होंने अपनी सैन्य जीवन यात्रा, महत्वपूर्ण कमांड पदों पर कार्यकाल और खास तौर पर 2020 के गलवान घाटी संघर्ष तथा लद्दाख में चीन के साथ हुए लंबे गतिरोध के अनुभवों का विस्तार से जिक्र किया है। पुस्तक में उन घटनाओं के पीछे की रणनीति, चुनौतियां और फैसलों के बारे में भी विस्तृत जानकारी होने की बात कही जा रही है। यह आत्मकथा रक्षा मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी (security clearance) के इंतजार में थी, क्योंकि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई संवेदनशील विवरण हैं।
लीक होने के बाद उठे सवाल
पुस्तक के अप्रकाशित हिस्सों के लीक होने के बाद रक्षा विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। लीक हुए हिस्सों में गलवान संघर्ष के दौरान हुई रणनीतिक चर्चाओं, चीन के साथ बातचीत के दौरान की गई तैयारी और कुछ गोपनीय निर्णयों का जिक्र होने की आशंका जताई जा रही है। रक्षा मंत्रालय और सेना मुख्यालय ने इस लीक को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना है। लीक होने से पहले पुस्तक पर रक्षा मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं लगाया गया था, लेकिन अब मंजूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
जांच के दायरे में कई संभावनाएं
पुलिस जांच में कई एंगल पर काम किया जा रहा है। संभावना है कि लीक प्रकाशक, संपादक, प्रिंटिंग प्रेस या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया गया हो, जिसे पुस्तक की प्री-प्रोडक्शन कॉपी मिली थी। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पुस्तक के मैन्यूस्क्रिप्ट की कॉपी कई लोगों तक पहुंच चुकी थी। दिल्ली पुलिस ने आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120बी (आपराधिक साजिश) और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। जांच में डिजिटल फॉरेंसिक, आईपी ट्रैकिंग और संदिग्ध व्यक्तियों के बयान शामिल हैं।
जनरल नरवणे और रक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया
जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने अभी तक इस लीक पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वह इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है और लीक होने वाले कंटेंट की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पुस्तक में कोई भी गोपनीय जानकारी प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए, बिना पूर्व अनुमति के। अब यह देखना होगा कि लीक हुए हिस्सों में कितनी संवेदनशील जानकारियां हैं और क्या पुस्तक के प्रकाशन पर कोई रोक लगाई जाती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव
यह घटना एक बार फिर सैन्य अधिकारियों की आत्मकथाओं और गोपनीय जानकारी के लीक होने की समस्या को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लीक हुए हिस्सों में वास्तव में संवेदनशील जानकारी है, तो यह भारत-चीन संबंधों और गलवान जैसे संघर्षों से जुड़े राजनयिक-रक्षात्मक पहलुओं को प्रभावित कर सकता है। दिल्ली पुलिस की जांच से जल्द ही पता चल जाएगा कि लीक किसने किया और इसके पीछे का मकसद क्या था। फिलहाल यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा चिंता का विषय बना हुआ है।


















































