लोकसभा में बड़ा राजनीतिक मोड़, विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया

नई दिल्ली: संसद में जारी गतिरोध के बीच विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को विपक्षी दलों ने लोकसभा सचिवालय में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस जमा कर दिया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत यह नोटिस दिया गया है। नोटिस पर कुल 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जिसमें कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और अन्य विपक्षी दल शामिल हैं।

विपक्ष के प्रमुख आरोप

विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला पर सदन के संचालन में गंभीर पक्षपात का आरोप लगाया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि स्पीकर ने कई मौकों पर सरकार के पक्ष में फैसले लिए, विपक्षी सांसदों को बोलने का मौका नहीं दिया और महत्वपूर्ण चर्चाओं को दबाया। विशेष रूप से हाल के बजट सत्र और पिछले कुछ महीनों में चर्चा, स्थगन प्रस्ताव और स्थगन नोटिस पर स्पीकर के रवैये को लेकर विपक्ष नाराज है। विपक्ष का दावा है कि स्पीकर ने सदन की गरिमा और निष्पक्षता को प्रभावित किया है।

नोटिस और प्रक्रिया

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं, लेकिन विपक्ष ने 118 हस्ताक्षर जुटाकर मजबूत संदेश दिया है। नोटिस मिलने के बाद लोकसभा स्पीकर को इसे स्वीकार करना होगा और सदन में चर्चा के लिए समय निर्धारित करना होगा। स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पास होने के लिए लोकसभा में बहुमत (272 सांसदों का समर्थन) जरूरी है। चूंकि एनडीए के पास वर्तमान में स्पष्ट बहुमत है, इसलिए प्रस्ताव के पास होने की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन यह राजनीतिक दबाव बनाने का बड़ा कदम है।

कांग्रेस और अन्य दलों का रुख

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि यह कदम स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाने और सदन की गरिमा बचाने के लिए उठाया गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि स्पीकर की भूमिका निष्पक्ष मध्यस्थ की होती है, लेकिन पिछले कुछ समय में वह सरकार के प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं। डीएमके, सपा और अन्य दलों ने भी इस नोटिस का समर्थन किया है।

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बीजेपी और सरकार का संभावित जवाब

बीजेपी और एनडीए की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार पार्टी इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति बता रही है। सरकार का मानना है कि स्पीकर ने सदन का संचालन नियमों के अनुसार किया है और विपक्ष हंगामा करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की ओर से तीखी बयानबाजी होने की संभावना है।

संसद में गतिरोध और प्रभाव

यह नोटिस ऐसे समय आया है जब संसद में बजट सत्र चल रहा है और विपक्ष कई मुद्दों पर हंगामा कर रहा है। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव संसद की कार्यवाही को और प्रभावित कर सकता है। यदि प्रस्ताव पर चर्चा होती है, तो यह सदन में कई दिनों तक बहस का विषय बनेगा। फिलहाल लोकसभा सचिवालय ने नोटिस प्राप्त होने की पुष्टि की है और आगे की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।

यह घटना 18वीं लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ पहला ऐसा बड़ा कदम है और आने वाले दिनों में राजनीतिक तापमान बढ़ने की उम्मीद है।

INPUT-ANANYA MISHRA

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