‘बजट का कोई मतलब नहीं अगर भ्रष्टाचार नहीं रुका…’, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय का तीखा हमला, राज्यपाल के भाषण को बताया कागजी

UP: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय (Mata Prasad Pandey) ने सरकार पर जमकर हमला बोला। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान माता प्रसाद ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल का भाषण कई बार पढ़ा है, लेकिन उसमें जितना लिखा है, अगर उतना धरातल पर उतर आए तो प्रदेश का कायाकल्प हो सकता है। उन्होंने कहा कि आजकल सबसे ज्यादा लोग भ्रष्टाचार से पीड़ित हैं, लेकिन बजट भाषण या राज्यपाल के अभिभाषण में इस पर कोई चर्चा नहीं की गई।

माता प्रसाद ने कहा कि गांव से लेकर शहर तक हर व्यक्ति भ्रष्टाचार से परेशान है। उन्होंने लोकायुक्त के जरिए जांच की कई रिपोर्टों का जिक्र किया, जो राज्यपाल के पास भेजी गई थीं, लेकिन आज तक सदन के पटल पर नहीं रखी गईं। उन्होंने कहा कि इन रिपोर्टों में 4 आईएएस अधिकारियों, जिला पंचायत अध्यक्षों और नगर पंचायत अध्यक्षों के नाम शामिल हैं। माता प्रसाद ने चेतावनी दी कि अगर इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो लोकायुक्त और लोकपाल का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को रोके बिना बजट का कोई मतलब नहीं रह जाता, क्योंकि इसका फायदा आम जनता तक नहीं पहुंचता। माता प्रसाद ने यह भी कहा कि वे सदन में उन आईएएस अधिकारियों के नाम नहीं लेंगे, क्योंकि ऐसा करने से सरकार को दिक्कत हो जाएगी। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि सरकार को नाम सुनते ही परेशानी होती है, लेकिन जनता रोज इनके भ्रष्टाचार से पीड़ित है।

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नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल के अभिभाषण को “कागजी शेर” करार देते हुए कहा कि उसमें विकास, सुशासन और जनकल्याण की बातें तो बहुत हैं, लेकिन धरातल पर इनका कोई असर नहीं दिख रहा। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि अगर भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगी तो 9 लाख करोड़ के बजट का क्या फायदा होगा।

माता प्रसाद के इस तीखे संबोधन के दौरान सदन में हलचल मची रही। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने बीच-बीच में टोकने की कोशिश की, लेकिन नेता प्रतिपक्ष ने अपना पूरा संबोधन बिना रुके पूरा किया। विपक्षी बैंचों से तालियां बजीं, जबकि सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इसका विरोध किया।

यह संबोधन बजट सत्र के दौरान विपक्ष की रणनीति को दर्शाता है, जिसमें भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की धीमी गति को प्रमुख मुद्दा बनाया जा रहा है। सपा ने सरकार से मांग की है कि लोकायुक्त की लंबित रिपोर्टों को तत्काल सदन के पटल पर रखा जाए और नामजद अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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