कुशीनगर:गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज के 700 छात्र परीक्षा से वंचित, फर्जी हस्ताक्षर और नियमों की अनदेखी से फार्म निरस्त

कुशीनगर जिले के पडरौना नगर स्थित गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज (पंजीकरण केंद्र संख्या 901) में यूपी बोर्ड हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के लिए पत्राचार (निजी/व्यक्तिगत) माध्यम से पंजीकृत करीब 700 छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इन सभी छात्रों के परीक्षा फार्म निरस्त कर दिए हैं, जिससे वे इस वर्ष बोर्ड परीक्षा नहीं दे सकेंगे। यह मामला फर्जी हस्ताक्षर और नियमों की गंभीर अनदेखी से जुड़ा है, जिसकी वजह से छात्रों की एक साल की मेहनत पर पानी फिर गया है। विभागीय लापरवाही का खामियाजा इन 700 निर्दोष छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।

फर्जी हस्ताक्षर और नियमों की अनदेखी

जांच में सामने आया कि इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए भरे गए फार्मों पर नोडल अधिकारी या प्रधानाचार्य के हस्ताक्षर नहीं थे। इसके बजाय कॉलेज के लिपिक ने स्वयं प्रधानाचार्य की जगह हस्ताक्षर कर दिए। प्रमाण पत्रों और अन्य दस्तावेजों पर भी यही फर्जीवाड़ा हुआ। साथ ही, परीक्षा शुल्क जमा नहीं किया गया था, जिसके कारण फार्म वैध नहीं माने गए। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव ने अपर सचिव को जांच का आदेश दिया है, और नोडल अधिकारी तथा प्रधान लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कॉलेज ने नियमों को दरकिनार कर फार्म भरे, जिससे बोर्ड ने सख्त कदम उठाया।

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छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश

यह खबर छात्रों और उनके अभिभावकों में भारी आक्रोश पैदा कर रही है। कई छात्रों ने कहा कि वे पूरे साल पढ़ाई करते रहे, लेकिन कॉलेज की लापरवाही से उनका साल बर्बाद हो गया। अभिभावक मांग कर रहे हैं कि जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो और छात्रों को वैकल्पिक व्यवस्था दी जाए। सोशल मीडिया पर भी यह मामला वायरल हो रहा है, जहां लोग विभागीय जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज पत्राचार माध्यम से परीक्षार्थियों के लिए पंजीकरण केंद्र था, लेकिन अब इन 700 छात्रों को परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश नहीं मिलेगा।

पुलिस/विभागीय कार्रवाई और आगे की स्थिति

माध्यमिक शिक्षा परिषद ने फार्म निरस्त करने के साथ जांच शुरू कर दी है। फर्जी हस्ताक्षर प्रकरण में कॉलेज प्रबंधन और संबंधित कर्मचारियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई संभव है। बोर्ड परीक्षा 2026 फरवरी-मार्च में होने वाली है, और ऐसे मामलों में छात्रों को राहत मिलना मुश्किल लग रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना उत्तर प्रदेश में निजी/पत्राचार परीक्षार्थियों के पंजीकरण में सख्ती की जरूरत को उजागर करती है। यदि छात्रों को कोई राहत मिलती है या अपील का रास्ता खुलता है, तो आगे अपडेट आएंगे। फिलहाल, 700 छात्रों का एक साल का परिश्रम व्यर्थ हो गया है, और जिम्मेदारों पर सवाल उठ रहे हैं।

INPUT-Rajkumar Giri

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