गोंडा के धानेपुर में आवारा कुत्तों का खौफनाक हमला: 6 वर्षीय मासूम बालिका की दर्दनाक मौत

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के धानेपुर थाना क्षेत्र में आवारा कुत्तों के हमले से एक छह वर्षीय (कुछ रिपोर्टों में पांच वर्षीय) बालिका की दर्दनाक मौत हो गई। बच्ची शौच के लिए घर से बाहर गई थी, तभी आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला बोल दिया। कुत्तों ने मुख्य रूप से उसके गले में गंभीर चोट पहुंचाई, साथ ही चेहरे, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी बुरी तरह काट-नोचा। हमले के दौरान बच्ची चीखती रही, लेकिन मदद पहुंचने में देर हो गई। परिजनों ने उसे तुरंत अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। घटना धानेपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई, जहां आवारा कुत्तों का आतंक लंबे समय से बना हुआ है।

परिवार और गांव में शोक का माहौल

घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। परिवार सदमे में डूबा हुआ है, और परिजन रोते-बिलखते बच्ची की मौत पर विलाप कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि बच्ची बहन के साथ बाहर गई थी, और हमले के दौरान बहन और अन्य बच्चे डरकर भाग गए। कुत्तों ने बच्ची को जमीन पर गिराकर नोच-नोचकर हमला किया, जिससे चेहरे और बॉडी पर गंभीर घाव आ गए। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार ने आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे पर प्रशासन से सवाल उठाए हैं और मांग की है कि इलाके से कुत्तों को हटाया जाए।

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आवारा कुत्तों के हमलों की बढ़ती समस्या

यह घटना उत्तर प्रदेश में आवारा कुत्तों के हमलों की बढ़ती घटनाओं की एक और मिसाल है। पिछले कुछ महीनों में संभल, मुरादाबाद, बाराबंकी और अन्य जिलों में भी कुत्तों के हमलों से बच्चे घायल हुए या मौतें हुई हैं। गोंडा में भी धानेपुर क्षेत्र में कुत्तों का झुंड अक्सर गांवों में घूमता है, और लोग डर के मारे घरों से बाहर नहीं निकल पाते। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर पालिका या पशु विभाग द्वारा कुत्तों को पकड़ने या नसबंदी की कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और मांगें

पुलिस ने घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचकर पंचनामा किया और जांच शुरू कर दी है। परिजनों ने शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आवारा कुत्तों को नियंत्रित न करने के लिए संबंधित विभागों पर लापरवाही का आरोप लगाया गया है। गांववासियों ने मांग की है कि तुरंत कुत्तों को पकड़ा जाए, नसबंदी अभियान चलाया जाए और इलाके में सुरक्षा बढ़ाई जाए। यह घटना एक बार फिर आवारा कुत्तों के खतरे को उजागर करती है, जहां निर्दोष बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। परिवार के लिए यह अपूरणीय क्षति है, और समाज में आवारा जानवरों की समस्या पर सख्त कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।

INPUT-ANANYA MISHRA