UP: लखनऊ (Lucknow) में इनकम टैक्स विभाग (Income Tax Department) की शिकायत पर राज्य कर विभाग ने बड़े पैमाने पर जीएसटी धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया कि एक संगठित गिरोह ने 15 से अधिक फर्जी फर्म बनाकर बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) बनाया और इसे अन्य कंपनियों को बेचकर करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी की। मुख्य फर्जी फर्म ‘स्वराज ट्रेडर्स’ के माध्यम से अकेले वित्तीय वर्ष 2024-25 में 52 लाख रुपये से अधिक का टैक्स चोरी किया गया।
गिरफ्त में आए चार आरोपी और बरामदगी
डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि गिरोह के चार सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं – तबस्सुम उर्फ गुलचमन उर्फ जान्हवी सिंह (साकेतनगर), प्रशांत बेन्जवाल (कल्याणपुर, कानपुर), सुमित सौरभ (इंदिरा नगर सेक्टर-11) और दौलत राम (नौबस्ता, कानपुर)। उनके कब्जे से 4.55 लाख रुपये नगद, तमंचा, जिंदा कारतूस, मोबाइल फोन, आधार-पैन कार्ड और स्विफ्ट डिजायर कार बरामद हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने लोगों को लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल किए और फर्जी किरायानामा बनाकर जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवाया।
फर्जी इनवॉइस और ITC का जाल
जांच में पता चला कि गिरोह का काम बेहद सुनियोजित था। सरगना अम्मार अंसारी फर्जी किरायानामा तैयार कर रजिस्ट्रेशन करवाता और फर्म के नाम पर GST-R1 फाइल कर बोगस ITC बनाता था। प्रशांत बेन्जवाल 1% कमीशन लेकर फर्जी इनवॉइस बनाता और ITC बेचता था। प्रत्येक फर्म के एवज में तबस्सुम और प्रशांत को एक लाख रुपये मिलते थे। जांच में एसएस गैलेक्सी और एसएस एंटरप्राइजेज जैसी फर्मों के माध्यम से भी 19 लाख रुपये से अधिक की GST चोरी का खुलासा हुआ।
आरोपियों की पृष्ठभूमि और आगे की कार्रवाई
तबस्सुम पहले टिफिन सर्विस चलाती थीं और ज्यादा कमाई के लालच में गिरोह में शामिल हुईं। प्रशांत पहले मेगा मार्ट में कैशियर थे और वेतन 10 हजार रुपये था, फिर उन्होंने नौकरी छोड़कर गिरोह में शामिल होना चुना। दौलत राम मजदूर है और 20 हजार रुपये के लालच में दस्तावेज दिए। गिरोह का सरगना अम्मार अंसारी पहले भी GST फ्रॉड में जेल जा चुका है और अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है और मोबाइल फोन व कार से बरामद सबूतों की जांच जारी है। विभाग ने आश्वासन दिया है कि सभी फर्जी फर्मों की पूरी जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



