UP: समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में फॉर्म-7 को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 में जिन भी नामों का उल्लेख है, वे सभी पीडीए के सदस्य हैं, जिनमें दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग शामिल हैं।
पीडीए प्रहरी को बढ़ाया सतर्कता
अखिलेश यादव ने पीडीए प्रहरी को सावधान करते हुए निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए और स्पष्ट किया कि वे इस लड़ाई को जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। उनका मानना है कि किसी भी नाम को काटने या प्रभावित करने की कोशिशों की जड़ जाति से जुड़ी हुई है।
सोशल मीडिया पर दावा
सपा अध्यक्ष ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लंबी पोस्ट में उन्होंने कहा कि दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों के नाम हटाने की जो भी कोशिशें हो रही हैं, उनका कारण जाति है। उन्होंने यह भी कहा कि पीडीए प्रहरी इस लड़ाई को आख़िर तक लड़ने के लिए तैयार हैं।
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अखिलेश यादव एक्स पोस्ट
भाजपा का फ़र्ज़ीनामा और चुनाव आयोग की बंद कबूतरी आँख का विस्तारपूर्वक विवरण:
फ़र्ज़ी फ़ॉर्म-7 में जितने भी नाम दिखे वो सब PDA हैं: पिछड़े हैं, दलित हैं, अल्पसंख्यक-मुस्लिम हैं।
नाम कटवाने के षड्यंत्र की सूची में :
कहीं कुर्मी, कहीं पटेल
कहीं पाल, कहीं मौर्य
कहीं लोध, कहीं… pic.twitter.com/GtVKeTqJpG— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) February 17, 2026
अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा, भाजपा का फ़र्ज़ीनामा और चुनाव आयोग की बंद कबूतरी आँख का विस्तारपूर्वक विवरण, फ़र्ज़ी फ़ॉर्म-7 में जितने भी नाम दिखे वो सब PDA हैं: पिछड़े हैं, दलित हैं, अल्पसंख्यक-मुस्लिम हैं।
नाम कटवाने के षड्यंत्र की सूची में :
कहीं कुर्मी, कहीं पटेल
कहीं पाल, कहीं मौर्य
कहीं लोध, कहीं लोधी
कहीं कुर्मी, कहीं यादव
कहीं पासी, कहीं पासवान
कहीं निषाद, कहीं मल्लाह
कहीं केवट, कहीं कश्यप
कहीं कुम्हार, कहीं प्रजापति
कहीं सोनकर, कहीं कोरी
कहीं अंसारी, कहीं भारती
कहीं पटेल, कहीं कनौजिया
कहीं बिंद, कहीं सैंथवार
कहीं भर, कहीं राजभर
कहीं कुंजरा, कहीं रयीन
कहीं गुर्जर, कहीं गडेरिया
कहीं गद्दी, कहीं घोसी
कहीं माली, कहीं सैनी
कहीं मणिहार, कहीं काचर
कहीं हज्जाम, कहीं सलमानी
कहीं तेली, कहीं समानी
कहीं रोगंगर, कहीं धोबी
कहीं लाखेर, कहीं गंगवार
कहीं बाथम, कहीं जाट,
कहीं कोई अन्य पीडीए…
ये सूची और भी लंबी हो सकती है, अगर चुनाव आयोग AI से निकलवाकर वो सूची दे दे, जो भाजपा ने उनको वोट काटने के लिए दी है या कहें भाजपा से उन्हें मिली है। सुनवाई के लिए 1-2 किमी के अंदर सुनवाई केंद्र बनाए जाएं और सुनवाई में अनसुनी न की जाए। पंचायत चुनाव को आरक्षण के नाम पर फँसाकर भाजपा सरकार इसलिए टाल रही है कि क्योंकि वो जानती है कि गाँव-गाँव तक जनता उनके विरुद्ध वोट डालने के लिए तैयार बैठी है और भाजपा हज़ार घपले-घोटाले के बावजूद भी जीतने की स्थिति में नहीं है। ये सरकार न जनगणना कर रही है, न जाति गिन रही है। भाजपा पूरी तरह नाकाम सरकार है।
जिनके नाम काटने की कोशिश हो रही हैं, सबकी कहानी एक ही जगह जाकर जुड़ती है : जाति से।
• जिन्होंने कटवाए – वो कौन हैं? वो सब भाजपा के वर्चस्ववादी, सामंतवादी, प्रभुत्ववादी लोग हैं या उनके संगी-साथी, जिनकी पीठ पर प्रशासन का हाथ है, और हाथ में चुनाव आयोग की ढाल है।
• उन्हें पता है कि वो फ़र्ज़ी फ़ॉर्म-7 भरेंगे, और चुनाव आयोग, प्रशासन कुछ नहीं करेगा।
• पर समाजवादी पार्टी अपनी लड़ाई लड़ेगी – जिला प्रशासन के पास भी जाएगी, और सुप्रीम कोर्ट तक भी।
• PDA वाले क़यामत तक लड़ेंगे अपने PDA के वोट के अधिकार की लड़ाई क्योंकि वोट छिना तो सब छिन जाएगा।
पीडीए प्रहरी सावधान रहें और वोट कटनेवाले हर पीड़ित की सहायता करें। निगरानी बढ़ा दें, और अपना नारा याद रखें :
एक भी वोट न कटने पाए!
एक भी वोट न घटने पाए!














































