गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने पूरी दुनिया में कराई भारत की बेइज्जती!

दिल्ली का भव्य भारत मंडपम और यहां चल रहा India AI impact Summit 2026 मंच पर भारत की AI ताकत, आत्मनिर्भर तकनीक और भविष्य की डिजिटल क्रांति का विज़न पेश किया जा रहा था। देश AI सुपरपावर बनने का दावा कर रहा था। लेकिन इसी मंच की एक घटना ने पूरे भारत की तकनीकी साख पर सवाल खड़े कर दिए और इसकी वजह बना गलगोटिया यूनिवर्सिटी। अब इसे गलगोटिया कहें या देश की इज्जत का गला घोंटने वाली ‘गलाघोटिया यूनिवर्सिटी’। इस समिट में चीनी रोबोट डॉग को अपना इनोवेशन बताने का दावा करके यूनिवर्सिटी ने न सिर्फ खुद को बेनकाब किया, बल्कि पूरे देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर शर्मसार कर दिया। यह विवाद इतना बढ़ गया कि समिट आयोजकों ने यूनिवर्सिटी को एक्सपो स्थल तुरंत खाली करने का आदेश तक दे डाला।

दरअसल, भारत मंडपम में चल रहे India AI impact Summit 2026 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल या पवेलियन में एक एक चार पैरों वाला रोबोटिक डॉग घूम रहा था, लोगों से हाथ मिला रहा था, कैमरे की तरफ देखकर पोज दे रहा था। इस दौरान डीडी न्यूज का एक रिपोर्टर यहां पहुंचता है। वो इस रोबोटिक डॉग के बारे में जानने की कोशिश करता है। इस पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह बहुत ही प्राउडली बोलती हैं ये है ओरियन। इसे हमारे यूनिवर्सिटी के Centre of Excellence ने डेवलप किया है। हम पहली प्राइवेट यूनिवर्सिटी हैं जिसने AI में 350 करोड़ रुपये से ज्यादा इन्वेस्ट किया है।

वीडियो डीडी न्यूज और सोशल मीडिया पर फैलता है। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्टॉनिक्स एंड आईटी और डिजिटल इंडिया के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया जाता है। तालियाँ बजती हैं। लेकिन अगले 24 घंटों में वही वीडियो वायरल हो जाता है – और गलगोटिया यूनिवर्सिटी न सिर्फ भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में शर्मिंदगी का सबसे बड़ा चेहरा बन जाती है। वायरल वीडियो में प्रोफेसर नेहा सिंह ओरियन के फीचर्स बता रही हैं। सर्विलांस, ऑटोनॉमस नेविगेशन, कैंपस पर फ्री घूमना। लेकिन गलगोटिया का झूठ ज्यादा देर तक नहीं छिप पाता।

सोशल मीडिया यूजर्स फैक्ट चेक में लग जाते हैं और देखते ही देखते सच्चाई सामने आ जाती है। जिसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी और उनकी प्रोफेसर नेहा सिंह ओरियन बताती हैं वो तो Unitree Go2 निकलता है! चीन की कंपनी Unitree Robotics का कमर्शियल प्रोडक्ट, जो अमेज़न, अलीबाबा जैसी साइट्स पर 2-3 लाख रुपये में उपलब्ध है। इसमें AI कैमरा, 4K वीडियो, स्पॉट जैसे फीचर्स पहले से हैं। ट्विटर पर मीम्स की बाढ़ आ जाती है।

लोग कहते हैं 350 करोड़ लगाकर 2.5 लाख का चाइनीज कुत्ता खरीदा? वाह क्या इनोवेशन! भारत AI superpower बनेगा, लेकिन पहले Unitree से कुत्ता इम्पोर्ट कर लें। Community Notes लग जाते हैं। Unitree की ऑफिशियल वेबसाइट के लिंक शेयर होते हैं। लोग साइड-बाय-साइड फोटो पोस्ट करते हैं – ओरियन और Go2 में कोई फर्क नहीं। गलगोटिया यूनिवर्सिटी के ट्विटर हैंडल पर एक प्रेस रिलीज टंग जाती है। जिसमें कहा जाता है— हम, गलगोटिया में कार्यरत शिक्षकगण और छात्र, हमारे विश्वविद्यालय के खिलाफ चलाए जा रहे दुष्प्रचार अभियान से गहरा आहत हैं।

हम स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि रोबोटिक प्रोग्रामिंग हमारे उस प्रयास का हिस्सा है जिसके माध्यम से हम छात्रों को AI प्रोग्रामिंग सिखाना चाहते हैं और उन्हें वैश्विक स्तर पर उपलब्ध टूल्स और संसाधनों का उपयोग करते हुए वास्तविक दुनिया के कौशल विकसित करने और लागू करने के लिए तैयार कर रहे हैं, क्योंकि AI प्रतिभा का विकास आज की आवश्यकता है। हमारे विश्वविद्यालय का विजन छात्र शिक्षा और नवाचार पर केंद्रित है, और हम छात्रों को आधुनिक तकनीकों तक पहुंच प्रदान करते हैं ताकि वे व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकें और भविष्य के लिए खुद को तैयार कर सकें। नकारात्मकता फैलाने से उन छात्रों का मनोबल प्रभावित हो सकता है, जो वैश्विक तकनीकों का उपयोग करते हुए नवाचार करने, सीखने और अपने कौशल को विकसित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

इस प्रेस रिलीज में एक शब्द इस्तेमाल किया गया ‘दुष्प्रचार’ यानी झूठी और भ्रामक जानकारी देना। ये तो वही बात हो गई कि उल्टा चोर कोतवाल को डांटे। चाइना के प्रोडक्ट को अपना बताकर झूठ किसने बोला? हम पहली प्राइवेट यूनिवर्सिटी हैं जिसने AI में 350 करोड़ रुपये से ज्यादा इन्वेस्ट किया है जैसी डींगे किसने हांकी? अरे आहत तो भारत हुआ, शर्मसार तो भारत के लोग हुए हैं। अंतराष्ट्रीय स्तर पर देश की बेइज्जती हुई है। भारत हमारा कुत्ता अपना बता रहा है! कहकर चीन के सोशल मीडिया पर मजाक उड़ाया जा रहा है।

समिट के नियम साफ थे – सिर्फ असली इनोवेशन्स, कोई IP वॉयलेशन या फर्जी दावे नहीं। ‘मेक इन इंडिया’ विजन को ठेस पहुंची, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय गेस्ट्स के सामने भारत का ‘इनोवेशन हब’ वाला इमेज धूमिल हो गया। आयोजकों ने तुरंत एक्शन लिया और 17 फरवरी 2026 को यूनिवर्सिटी को बाहर का रास्ता दिखा दिया। विवाद बढ़ता देख गलगोटिया ने सफाई दी। “हमने कभी कहा ही नहीं कि ये हमने बनाया है। स्टूडेंट्स बस इसकी कैपेबिलिटीज टेस्ट कर रहे थे।” लेकिन ये सफाई देर से आई। स्टॉल पर लगे बैनर्स और प्रेजेंटेशन में ‘गलगोटिया इनोवेशन’ का हाइलाइट था, जो वीडियोज में कैद हो चुका है।

AI समिट जैसे इवेंट्स में दुनिया भर के एक्सपर्ट्स आते हैं। यहां चीन का रोबोट ‘भारतीय’ बनाकर पेश करना न सिर्फ IP चोरी का केस है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ को मखौल उड़ाने जैसा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंटरनेशनल गेस्ट्स ने सवाल उठाए: “अगर टॉप यूनिवर्सिटी ऐसी करेगी, तो स्टार्टअप्स का क्या होगा?” ये भारत की बढ़ती AI पावर को कमजोर करने वाला ब्लो था, खासकर जब 2026 में AI बजट बढ़ाने की बात चल रही है।

अब गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ और विवादों पर भी बात कर लेते हैं। रोबोटिक डॉग विवाद के बाद सोशल मीडिया पर इस यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ फॉर्मेसी के रिसर्च स्कॉलर धर्मेंद्र कुमार का एक रिसर्च पेपर वायरल हो रहा है, जिसे 2020 में लिखा गया। जिसका टाइटल था— थाली या घंटी से निकली साउंड वाइब्रेशंस से कोरोना वायरस मर जाता है: एक संभावित परिकल्पना।

इसके अलावा इसी यूनिवर्सिटी के कुछ स्टूडेंट्स का वीडियो वायरल है, जिसे 2024 का बताया जा रहा है। इस वीडियो में स्टूडेंट्स को कांग्रेस के घोषणापत्र के खिलाफ प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतार दिया गया, जबकि छात्र ठीक से बता भी भी नहीं पा रहे थे कि आख़िर वे क्यों प्रदर्शन कर रहे थे। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर प्लेसमेंट और फीस से जुड़े विवाद देखे जा सकते हैं।

फिलहाल, ये विवाद सिर्फ गलगोटिया का नहीं – भारतीय एजुकेशन सिस्टम की बीमारी को दिखाता है। PR over substance। जहां यूनिवर्सिटीज़ करोड़ों मार्केटिंग में लगाती हैं, लेकिन असली रिसर्च, पेटेंट, प्रोडक्ट्स नहीं। जहां छात्रों को इनोवेटर्स बनाने के बजाय इवेंट अटेंडर्स बनाया जाता है। भारत को AI में लीड करना है तो IITs, IISc, स्टार्टअप्स जैसे असली इनोवेशन चाहिए – न कि 2.5 लाख का चाइनीज कुत्ता 350 करोड़ के AI इकोसिस्टम का चेहरा बनाकर।

गलगोटिया के लिए ये teachable moment है। अगली बार रोबोट दिखाएँ तो पहले बताएँ – ये Unitree का है, हम इसे मॉडिफाई कर रहे हैं। क्योंकि दुनिया देख रही है। और आजकल सच बहुत जल्दी पकड़ में आ जाता है।

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