लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का भाषण एक दिलचस्प मोड़ ले गया, जब उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन पर हल्का-फुल्का टिप्पणी कर दी। जैसे ही वे बोलने के लिए खड़े हुए, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (OM Birla) ने उनके हाथ में लगी चोट के बारे में पूछा। राहुल ने सहजता से जवाब दिया और फिर अपने संबोधन की शुरुआत की।
सदन में हंसी का माहौल
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने महिलाओं की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि वे आज समाज की ‘ड्राइविंग फोर्स’ बन चुकी हैं। उन्होंने राहुल ने कहा, माता, बहन, पत्नी और अन्य रूपों में महिलाओं ने हमारे जीवन को बहुत प्रभावित किया है। हालांकि, पीएम और मेरी तो पत्नी ही नहीं हैं। तो सदन में ठहाके गूंज उठे। इस हल्के पल ने कुछ देर के लिए गंभीर बहस को सहज बना दिया।
प्रियंका गांधी का जिक्र
राहुल गांधी ने अपनी बहन प्रियंका गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने कम समय में प्रभावशाली भाषण दिया। उन्होंने यह भी बताया कि उनके भाषण से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मुस्कुराते नजर आए। राहुल ने माना कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर महिलाओं के कुछ अनुभव नहीं हैं, लेकिन जीवन में महिलाओं के विभिन्न रूपों से उन्होंने बहुत कुछ सीखा है।
इंदिरा गांधी से मिली सीख
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री Indira Gandhi का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें निडरता, सत्य और अहिंसा का महत्व सिखाया। उन्होंने बचपन की एक घटना साझा करते हुए कहा कि समस्याओं से भागने के बजाय उनका सामना करना जरूरी है।
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विधेयक पर सरकार पर निशाना
भाषण के अंत में राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह विधेयक वास्तविक महिला सशक्तीकरण से जुड़ा नहीं है। उनका आरोप था कि इसके जरिए चुनावी समीकरण बदले जा रहे हैं और विशेष रूप से एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के अधिकारों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस प्रस्ताव का विरोध करेगा।



