रायबरेली: रायबरेली में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों के पंजीकरण और उन्हें ऑनलाइन कराने की प्रक्रिया अब और कठिन हो गई है। शासन द्वारा एक अक्टूबर से लागू किए गए नए प्रावधानों के तहत अब दो साल से पुराने मामलों में मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी कर दी गई है।
एक अक्टूबर से लागू हुए नए प्रावधान
शासन के नए निर्देशानुसार, जिले में जन्म और मृत्यु के मामलों के पंजीकरण के लिए अब समय-सीमा के आधार पर अलग-अलग स्तर तय कर दिए गए हैं। दो वर्ष से अधिक मामलों में अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश और सत्यापन के बाद ही प्रमाणपत्र बन सकेंगे। वहीं, एक से दो वर्ष के भीतर के मामलों के लिए उपजिलाधिकारी (एसडीएम) की अनुमति अनिवार्य कर दी गई है।
21 दिन के भीतर पंजीकरण है नि:शुल्क
नियमों के मुताबिक, यदि घटना की सूचना 21 दिन के भीतर दी जाती है, तो पंजीकरण पूरी तरह नि:शुल्क होता है। अस्पताल में जन्म या मृत्यु होने पर संबंधित संस्थान द्वारा ही इसकी सूचना दर्ज कराई जाती है। इसके बाद, 30 दिन के भीतर पंजीकरण कराने पर निर्धारित विलंब शुल्क के साथ शपथपत्र और देरी का कारण देना होता है।
तहसीलों में बढ़ी फरियादियों की मुश्किलें
जिले की सदर, डलमऊ, लालगंज, महराजगंज, ऊंचाहार और सलोन तहसीलों में पुराने ऑफलाइन प्रमाणपत्रों को ऑनलाइन कराने के लिए पहले से ही लंबी लाइनें लग रही थीं। तहसील स्तर पर ऐसे लंबित मामलों की संख्या 20 हजार से अधिक है। अब न्यायिक प्रक्रिया जुड़ जाने के कारण आवेदकों को वकीलों और लंबी कागजी औपचारिकताओं से गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनका समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं।
क्या बोले जिम्मेदार?
एडीएम प्रशासन सिद्धार्थ ने बताया कि शासनादेश के अनुसार, दो साल से अधिक मामलों में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बन सकेंगे। इसके अलावा दो साल से पहले जो जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र ऑफलाइन बने थे, उन्हें ऑनलाइन कराने के लिए भी यही प्रक्रिया अपनानी होगी।
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