उत्तर प्रदेश में दस फरवरी को पश्चिम में पहले चरण का मतदान होगा। ऐसे में नामाकंन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी पार्टियों के प्रत्याशियों की अपराधी प्रवृत्ति से जुड़ी जानकारी को साझा किया गया है। प्रदेश में पहले फेज में कुल 623 प्रत्याशी मैदान में हैं। ‘द एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) ने राज्य के 11 जिलों में 58 विधानसभा सीटों से राजनीतिक दलों के 615 उम्मीदवारों और निर्दलीय उम्मीदवारों के स्व-हलफनामों का विश्लेषण किया है। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार यूपी में पहले चरण की 58 सीटों पर हो रहे चुनाव में सपा के 75 प्रतिशत उम्मीदवारों पर आपराधिक मुकदमे हैं वहीं, रालोद ने 59 प्रतिशत आपराधिक छवि वालों को दिए हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए 25 प्रतिशत उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। इनमें से 615 प्रत्याशियों के हलफनामे का विश्लेषण किया गया एक चौथाई यानी 156 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
द एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) की रिर्पोट के अनुसार 615 प्रत्याशियों मे से 25 प्रतिशत प्रत्याशियों पर गंभीर आरोप हैं। पहले फेज के चुनाव में सपा में सबसे ज्यादा अपराधी प्रवृत्ति के प्रत्याशी पहले फेज के चुनाव में सपा के 28 में से 21 प्रत्याशियों पर अपराधी है दूसरे नम्बर पर आरएलडी के प्रत्याशियों पर आपराधिक आरोप आरएलडी के पहले फेज में 29 में से 17 प्रत्याशी आपराधी प्रवृत्ति के एडीआर रिपोर्ट के अनुसार ”विश्लेषण किए गए 615 उम्मीदवारों में से 156 (25 प्रतिशत) उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जबकि 121 (20 प्रतिशत) ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं।”
सपा के 28 उम्मीदवारों में से 21 (75 प्रतिशत), रालोद के 29 उम्मीदवारों में से 17 (59 प्रतिशत), बीजेपी के 57 उम्मीदवारों में से 29 (51 प्रतिशत), कांग्रेस के 58 उम्मीदवारों में से 21 (36 प्रतिशत), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के 56 उम्मीदवारों में से 19 (34 प्रतिशत) और आम आदमी पार्टी (आप) के 52 उम्मीदवारों में से आठ (15 प्रतिशत) ने अपने हलफनामों में अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं।
सर्वाधिक मुकदमे सपा के योगेश पर
सबसे अधिक मुकदमे मेरठ के हस्तिनापुर से सपा प्रत्याशी योगेश वर्मा पर है। गंभीर अपराध की इनमें 71 है हत्या के प्रयास की धाराएं भी शामिल हैं।
Also Read: योगी सरकार की योजना से संवरने लगी पशुपालकों, कृषक और कुपोषित परिवारों की जिंदगी
( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )













































