लखनऊ में बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) की एक शाखा (डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय परिसर, पारा मोहान रोड) में बड़ा धोखाधड़ी कांड सामने आया है। बैंक मित्र (कोरस्पॉन्डेंट बैंक एजेंट) ने फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) रसीदें जारी करके सैकड़ों ग्राहकों से करोड़ों की ठगी की। पीड़ितों में कई ऐसे हैं जिन्होंने बेटियों की शादी, बच्चों की पढ़ाई या अन्य जरूरतों के लिए पैसे जमा किए थे, लेकिन खाते से रकम गायब हो गई। एक पीड़ित ने बताया कि बेटी की शादी की डेट कैंसिल हो गई क्योंकि बचत गायब हो गई। आरोपी बैंक मित्र ने ठगी से कमाए पैसों से डेढ़ करोड़ का आलीशान मकान बनवाया।
घटना का खुलासा और पीड़ितों की स्थिति
जनवरी 2026 में दर्जनों ग्राहक बैंक पहुंचे तो पता चला कि उनके खातों से FD और बचत राशि अचानक गायब है। कुछ रिपोर्ट्स में 100 से ज्यादा खातों का जिक्र है, जहां कुल रकम करोड़ों में बताई जा रही है। पीड़ितों में ग्रामीण और मध्यम वर्ग के लोग शामिल हैं। एक पीड़ित शालिग्राम ने कहा कि बेटी की शादी के लिए 12 लाख जमा किए थे, लेकिन सब गायब। दूसरे ने 7.80 लाख FD कराई थी तीन बेटियों की शादी के लिए, जो अब शून्य हो गई। कई लोगों ने फर्जी FD रसीदें लीं, लेकिन असल में पैसा ट्रांसफर नहीं हुआ या फर्जी खातों में चला गया। ग्राहक बैंक के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं, कर्मचारियों को घेरा और शटर गिराया।
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बैंक मित्र शिवा राव की भूमिका और गिरफ्तारी
मुख्य आरोपी बैंक मित्र शिवा राव (पूर्व सिक्योरिटी गार्ड) है, जिसने फर्जी FD प्रमाण पत्र बनाकर लोगों से पैसे लिए। उसके पास लैपटॉप, प्रिंटर और अन्य उपकरण थे जिनसे फर्जी दस्तावेज तैयार किए। पारा पुलिस ने शिवा राव को गिरफ्तार किया। उसके पास से 2.38 लाख नकद और बैंक दस्तावेज बरामद हुए। पुलिस को उसके राजाजीपुरम (सरीपुरा) में डेढ़ करोड़ के आलीशान मकान की जानकारी मिली, जो ठगी से कमाए पैसों से बनवाया गया। शिवा का एक सहयोगी (बैंक में चाय बांटने वाला व्यक्ति) भी गिरफ्तार हुआ, जिसने बैंक अधिकारियों से जान-पहचान कराई और ठगी में मदद की। अब तक 24-50 से ज्यादा पीड़ितों की शिकायतें दर्ज, कुल 50 लाख से ज्यादा की रकम की पुष्टि हुई, लेकिन कुल आंकड़ा 100+ खातों तक पहुंच सकता है।
पुलिस जांच की स्थिति
पारा थाना पुलिस और आर्थिक अपराध शाखा जांच कर रही है। फर्जी दस्तावेज, बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल रिकॉर्ड्स और बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच हो रही है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी आंतरिक जांच शुरू की है। पीड़ितों का आरोप है कि बैंक अधिकारी शिकायत पर सबूत मांगते हैं और मदद नहीं करते। कुछ मामलों में बैंक कर्मचारियों पर भी सवाल उठे हैं। पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की संभावना जताई है।
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पीड़ितों की व्यथा और सामाजिक प्रभाव
पीड़ितों में कई महिलाएं और बुजुर्ग हैं। एक ने बताया- “बेटी की शादी सिर पर है, सारी जमा पूंजी गायब।” दूसरे ने कहा- “बैंक मित्र पर भरोसा किया, अब घर-बार सब संकट में। यह मामला डिजिटल/एजेंट बैंकिंग में भरोसे की कमी और फ्रॉड की बढ़ती समस्या को उजागर करता है।











































