UP पंचायत चुनाव 2026: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियां जोरों पर हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने मतपत्र छपाई पूरी कर ली है और अब 75 जिलों में करीब 60 करोड़ मतपत्र पहुंचाए जा रहे हैं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण के साथ ही यह प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे चुनाव की उल्टी गिनती शुरू मानी जा रही है। चुनाव अप्रैल-जुलाई 2026 के बीच होने की संभावना है, जिसमें ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर मतदान होगा। मतपत्रों को पुलिस-पीएसी की सुरक्षा में स्ट्रांग रूम में रखा जा रहा है।
मतपत्र वितरण की प्रक्रिया शुरू
राज्य निर्वाचन आयोग ने विशेष प्रकार के कागज पर मतपत्र छपाई पूरी कर ली है। प्रदेश के 75 जिलों में कुल लगभग 60 करोड़ मतपत्र भेजे जा रहे हैं, क्योंकि यूपी में पंचायत चुनाव में अलग-अलग स्तरों (ग्राम प्रधान, सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य) के लिए अलग-अलग मतपत्र होते हैं। विभिन्न जिलों में यह प्रक्रिया शुरू हो गई है
अमेठी में मतपत्र पहुंच चुके हैं, जहां 16 लाख से अधिक मतदाता मतदान करेंगे। इन्हें स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखा गया है।
शामली में 33.44 लाख मतपत्र पहुंचे हैं। अन्य जिलों में भी ट्रक और सुरक्षा बलों के साथ वितरण जारी है। यह कार्रवाई इसलिए पहले शुरू की गई है क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में मतपत्रों का वितरण समय लेता है।
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चुनाव की समयसीमा और अन्य तैयारियां
पिछले चुनाव 2021 में अप्रैल में चार चरणों में हुए थे। इस बार भी अप्रैल-जुलाई 2026 के बीच चुनाव होने की उम्मीद है। मतदाता सूची का पुनरीक्षण जारी है, पहली सूची जारी हो चुकी है, दावे-आपत्तियां निस्तारण के बाद 28 मार्च को अंतिम सूची जारी होगी । लगभग 4 मिलियन नए मतदाता जुड़ने की संभावना।ओबीसी आरक्षण को लेकर आयोग गठन एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है,जो चुनाव तिथि पर असर डाल सकता है। प्रत्याशियों के खर्च सीमा दोगुनी करने और अन्य नियमों में बदलाव किए गए हैं।
राजनीतिक महत्व और प्रतिक्रियाएं
यूपी पंचायत चुनाव ग्रामीण स्तर पर राजनीतिक ताकत का बड़ा परीक्षण होते हैं। पिछले चुनावों में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन इस बार सपा, बसपा और कांग्रेस भी जोर लगा रही हैं। मतपत्र पहुंचने से कार्यकर्ताओं में जोश बढ़ गया है, और X पर #UPPanchayatElection2026 ट्रेंड कर रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में OBC आयोग को सबसे बड़ा रोड़ा बताया जा रहा है, क्योंकि आरक्षण विवाद चुनाव स्थगित करवा सकता है।










































