प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच चल रहे विवाद के बीच संत समाज दो धड़ों में बंट गया है। काशी, अयोध्या और मथुरा समेत देश के संतों में कुछ अविमुक्तेश्वरानंद को सही बता रहे, तो कुछ उन्हें गलत कह रहे।इस पूरे विवाद पर मंहत रविंद्र पुरी ने ब्रेकिंग ट्यूब से की खास बातचीत।
महाराज रविंद्र पुरी ने अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर ब्रेकिंग ट्यूब पर जाने क्या कहा
1-अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने कहा- प्रयागराज में मिनी महाकुंभ चल रहा। मुख्यमंत्री को अकबर और हुमायूं का बेटा बताए जाने पर कहा कि यह एक संत की भाषा नहीं हो सकती। उन्हें कोई शिकायत थी, तो मुख्यमंत्री से शिकायत करते या कोर्ट जाते। वह सीधे मुख्यमंत्री पर क्यों निशाना साध रहे?
2-सनातन को आगे बढ़ाने का काम अगर कोई कर रहा, तो वह प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और गृहमंत्री कर रहे हैं।, लेकिन ना जाने अविमुक्तेश्वरानंद को आखिर क्या दिक्कत है।
3- तमाम विपक्ष के नेताओ से वो मिल रहे है और साधु संत के समाज को लेकर वो नहीं सोचते,उनसे मैं मिलने की कोशिस किया जिससे की ये विवाद समाप्त हो जाए लेकिन उन्होने मिलने से मना कर दिया।
4- अविमुक्तेश्वरानंद को सिर्फ राजनीति करने आता है,वह एक इतने बड़े महाराज है तो उन्हे सबकी सुननी चाहिए,माघ मेला को सिर्फ भारत के लोग नहीं देख रहे बल्की पूरा विश्व इसे देख रहा है ,और इस बात को ध्यान में रखते हुए अविमुक्तेश्वरानंद को साधु समाज का इज्जत करना चाहिए।
माघ मेले में क्या हुआ?
माघ मेले 2026 के दौरान मौनी अमावस्या (जनवरी मध्य) के स्नान पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी और छत्र के साथ शाही स्नान की मांग को प्रशासन ने रोका। उनका आरोप था कि पुलिस ने उन्हें संगम स्नान से रोका और मारपीट की। इसके विरोध में उन्होंने धरना दिया, भूख हड़ताल की और प्रशासन पर “अहंकार” का आरोप लगाया। मेला प्रशासन ने जवाब में नोटिस जारी किया – “शंकराचार्य” का पद कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं? क्योंकि ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) के शंकराचार्य पद पर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है, और उनकी नियुक्ति पर अखाड़ों का विरोध रहा है। अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे “श्रद्धा पर हमला” बताया और सीधे मुख्यमंत्री योगी पर निशाना साधा।
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रविंद्र पुरी का बयान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अकबर और हुमायूं का बेटा बताना एक संत की भाषा नहीं हो सकती। अगर शिकायत थी, तो मुख्यमंत्री से सीधे शिकायत करते या कोर्ट जाते। सीधे निशाना साधना क्यों?”
सनातन की रक्षा सरकार कर रही “सनातन को आगे बढ़ाने का काम प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और गृहमंत्री कर रहे हैं। राम मंदिर बनवाया, मिनी कुंभ जैसा आयोजन किया – क्या इनका दोष है? योगी खुद एक संत हैं, उन्हें सम्मान नहीं देने से कौन सम्मान देगा? माघ मेले में कोई शाही स्नान नहीं होता। जनता ने स्नान किया तो हम साधु संतो ने भी कर लिया। अविमुक्तेश्वरानंद बेवजह जिद कर रहे थे – 50 मीटर पैदल चलने से समस्या? करोड़ों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, विवाद खड़ा करना हिंदू समाज के लिए नुकसानदायक है।कई लोग ऐसे है जो संतों को आपस में लड़ाना चाहते हैं। अखाड़ा परिषद के संतों से बात करेंगे, लेकिन उनकी भाषा और रवैया संतों के अनुरूप नहीं।”
अविमुक्तेश्वरानंद के विवाद पर कई साधु-संत समर्थक में उतरे तो कई विरोध कर रहे
अनिरुद्धाचार्य जैसे कुछ पीठाधीश्वर प्रशासन पर “अकड़” और “मारपीट” का आरोप लगा रहे हैं। एक ने इसे “भयंकर युद्ध का आमंत्रण” बताया। कुछ संत कह रहे हैं कि शंकराचार्य का अपमान हो रहा है, और सरकार को माफी मांगनी चाहिए।
महंत रविंद्र पुरी, जगद्गुरु रामभद्राचार्य, सतुआ बाबा और कई अन्य संत अविमुक्तेश्वरानंद को गलत ठहरा रहे हैं। रामभद्राचार्य ने कहा – “उन्हें नोटिस मिलना सही, उन्होंने अन्याय किया।” सतुआ बाबा ने कहा – “जो विवाद खड़ा करेगा, वह सनातनी नहीं।” हजारों संतों ने उनके खिलाफ एकजुटता दिखाई, उन्हें “फर्जी शंकराचार्य” या “विवाद फैलाने वाला” बताया।
विवाद का असर और संभावित परिणाम
यह विवाद अब सिर्फ मेला प्रोटोकॉल का नहीं रहा – यह शंकराचार्य पद की वैधता, संत समाज की एकता और सरकार vs धार्मिक नेतृत्व की बहस बन गया है। सुप्रीम कोर्ट में ज्योतिर्मठ मामले की सुनवाई लंबित है, जो पद की वैधता पर फैसला करेगा। फिलहाल माघ मेले में बसंत पंचमी स्नान जारी है।
INPUT-ANANYA MISHRA









































