आज के दौर में सर्जरी की सफलता केवल ऑपरेशन टेबल तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि मरीज की संपूर्ण सुरक्षा, ऑपरेशन के बाद दर्द से राहत और शीघ्र सामान्य जीवन में वापसी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। इन सभी पहलुओं में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका अत्यंत केंद्रीय और निर्णायक होती है।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गोरखपुर के एनेस्थीसियोलॉजी, पेन मेडिसिन एवं क्रिटिकल केयर विभाग द्वारा GRACE-1.0 (Gorakhpur Regional Anaesthesia Continuing Education 2026) का आयोजन किया गया।
यह शैक्षणिक कार्यक्रम संस्थान की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता, (सेवानिवृत्त) के सक्रिय एवं दूरदर्शी नेतृत्व में आयोजित हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य मरीजों को सुरक्षित, वैज्ञानिक तथा दर्द-मुक्त एनेस्थीसिया एवं पेन मैनेजमेंट सेवाएं प्रदान करना है।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि रीजनल एनेस्थीसिया केवल सर्जरी के दौरान शरीर के किसी हिस्से को सुन्न करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य ऑपरेशन के बाद लंबे समय तक दर्द से राहत (एनाल्जीसिया) प्रदान करना भी है।
अनेक सर्जरी में जनरल एनेस्थीसिया के साथ-साथ अल्ट्रासाउंड की सहायता से नर्व ब्लॉक्स दिए जाते हैं, जिससे सर्जरी के बाद होने वाला दर्द काफी हद तक कम हो जाता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में केवल रीजनल एनेस्थीसिया से ही सर्जरी संभव होती है, जबकि कई जटिल मामलों में एक से अधिक नर्व ब्लॉक्स का संयोजन भी किया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक रीजनल एनेस्थीसिया तकनीकों से मरीजों को कई लाभ मिलते हैं, जिनमें शामिल हैं—
जनरल एनेस्थीसिया की दवाओं की आवश्यकता में कमी
ऑपरेशन के बाद तेज दर्द की संभावना कम होना
ओपिऑइड एवं तीव्र दर्द निवारक दवाओं पर निर्भरता घटना
उल्टी, चक्कर, अत्यधिक सुस्ती और सांस संबंधी जटिलताओं में कमी
मरीज का जल्दी बैठना, चलना और फिजियोथेरेपी शुरू कर पाना
GRACE-1.0 में विशेषज्ञों ने बताया
* कंधे और हाथ की सर्जरी में नर्व ब्लॉक्स से लंबे समय तक प्रभावी दर्द राहत मिलती है
* घुटने और हिप सर्जरी के बाद मरीज जल्दी चलने-फिरने में सक्षम हो जाता है
* पेट और छाती की सर्जरी में विशेष ब्लॉक्स से ऑपरेशन के बाद कई घंटों तक आराम मिलता है
इन सभी तकनीकों का उद्देश्य केवल सर्जरी कराना नहीं, बल्कि सर्जरी के बाद मरीज को अधिकतम आराम और शीघ्र रिकवरी प्रदान करना है।
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मल्टीमोडल एनाल्जीसिया: दर्द प्रबंधन का आधुनिक दृष्टिकोण
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि आज दर्द नियंत्रण के लिए एक ही दवा पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न तरीकों का संयोजन अपनाया जाता है, जिसे मल्टीमोडल एनाल्जीसिया कहा जाता है।
इसमें नर्व ब्लॉक्स, हल्की दर्द निवारक दवाएं और अन्य सहायक उपाय शामिल होते हैं, जिससे मरीज अधिक सुरक्षित रहता है और गंभीर दवाओं की आवश्यकता कम पड़ती है।
कार्यक्रम के दौरान अल्ट्रासाउंड मशीन की सहायता से नसों को प्रत्यक्ष देखकर दवा देने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। इससे दवा सही स्थान पर पहुंचती है और जटिलताओं की संभावना न्यूनतम हो जाती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि एनेस्थीसियोलॉजिस्ट
* सर्जरी से पहले मरीज का संपूर्ण मूल्यांकन करते हैं
* ऑपरेशन के दौरान जीवन-रक्षक निगरानी रखते हैं
* ऑपरेशन के बाद दर्द नियंत्रण और रिकवरी की जिम्मेदारी निभाते हैं
* आईसीयू और इमरजेंसी सेवाओं में भी अहम भूमिका निभाते हैं
इस कार्यक्रम का आयोजन प्रो. (डॉ.) संतोष कुमार शर्मा,
प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, एनेस्थीसियोलॉजी, पेन मेडिसिन एवं क्रिटिकल केयर, एम्स गोरखपुर
के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम की आयोजन सचिव डॉ. प्रियंका द्विवेदी रहीं।
मरीजों के लिए महत्वपूर्ण संदेश
डॉक्टरों ने मरीजों को सलाह दी कि सर्जरी से पहले वे—
* ऑपरेशन के बाद दर्द से राहत के उपलब्ध विकल्पों के बारे में जानकारी लें
* अपनी सभी बीमारियों और दवाओं की सही जानकारी दें
* एनेस्थीसियोलॉजिस्ट से खुलकर संवाद करें
इससे उपचार अधिक सुरक्षित, दर्द-मुक्त और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ देने वाला बनता है।
INPUT-ANANYA MISHRA













































