संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक मुस्लिम युवती ने हिंदू युवक से शादी करने की अपनी इच्छा जाहिर की है। युवती ने बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया है, जिसमें उसने स्पष्ट कहा है कि यह उसका व्यक्तिगत फैसला है और वह हिंदू रीति-रिवाज से शादी करना चाहती है। मामला इंटरफेथ लव मैरिज का है, जो पिछले 3-4 साल से चल रही प्रेम कहानी पर आधारित है। पुलिस जांच में दोनों पक्षों की बात सुनी जा रही है।
प्रेम कहानी का पूरा विवरण
संभल के हजरतनगर गढ़ी थाना क्षेत्र के नवाडा गांव की रहने वाली मुस्लिम युवती समरीन और गांव के ही हिंदू युवक अंकित कुमार के बीच करीब चार साल से प्रेम संबंध चल रहे हैं। दोनों की बातचीत और समझदारी से रिश्ता मजबूत हुआ। 26 जनवरी को समरीन अचानक अंकित के घर पहुंच गई और उसके साथ रहने तथा शादी करने की जिद पर अड़ गई। अंकित के परिवार ने सहमति जताई, लेकिन समरीन के परिजनों ने विरोध किया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
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बाल कल्याण समिति में बयान
परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मामला संभाला। सोमवार को पुलिस ने समरीन को बहजोई स्थित बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया। वहां न्यायपीठ के सामने समरीन ने अपना बयान दर्ज कराया। उसने कहा कि वह अंकित के साथ रहना चाहती है, हिंदू धर्म के अनुसार शादी करना चाहती है और यह उसका खुद का फैसला है। कोई दबाव या जबरदस्ती नहीं है। अंकित ने भी कहा कि दोनों बालिग हैं और कानून के अनुसार हिंदू रीति से शादी करना चाहते हैं। समरीन ने अपनी अम्मी के खिलाफ भी कुछ खुलासे किए, जिससे मामला और गहरा हो गया।
पुलिस जांच और दोनों पक्षों की स्थिति
पुलिस ने दोनों पक्षों से पूछताछ की है। जांच में युवती की उम्र, सहमति और प्रेम संबंध की सच्चाई पर फोकस है। अंकित के परिवार ने युवती को कुछ समय के लिए रिश्तेदारी में भेज दिया था ताकि गांव में विवाद न फैले। समरीन के परिजन शादी के खिलाफ हैं और पुलिस से सहायता मांग रहे हैं। मामला दो समुदायों से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील है, इसलिए पुलिस सतर्क है और कोई बड़ा विवाद न हो, इस पर नजर रख रही है।
कानूनी और सामाजिक पहलू
भारतीय कानून में बालिग व्यक्तियों को अपनी मर्जी से शादी करने का अधिकार है (स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत)। बाल कल्याण समिति का रोल नाबालिग या असहाय मामलों में सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन यहां युवती ने अपनी सहमति जताई है। यह मामला इंटरफेथ मैरिज की बहस को फिर से उजागर कर रहा है, जहां व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक/सामाजिक विरोध आमतौर पर टकराते हैं।













































