बिहार के दरभंगा जिले के हरिनगर गांव में एक साधारण मजदूरी और पैसे के लेन-देन का विवाद इतना बढ़ गया कि पूरे ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट के तहत FIR दर्ज कर दी गई। शिकायतकर्ता अशर्फी पासवान (दलित समुदाय) ने आरोप लगाया कि 31 जनवरी 2026 को ब्राह्मणों ने उनके परिवार पर सामूहिक हमला किया, मारपीट की और महिलाओं-बच्ची को घायल किया। पुलिस ने 70 ब्राह्मणों को नामजद और 100-150 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया, जिससे गांव के लगभग सभी 210 ब्राह्मण पुरुष प्रभावित हो गए। कई आरोपी दिल्ली-मुंबई में मजदूरी कर रहे थे और घटना के समय गांव में नहीं थे। अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बाकी फरार बताए जा रहे हैं। यह मामला SC/ST एक्ट के दुरुपयोग की बहस को फिर से गरमा रहा है।
घटना की शुरुआत और विवाद का कारण:
दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र अंतर्गत हरिनगर गांव में ब्राह्मण और दलित समुदाय के बीच पुराना विवाद चल रहा था। शिकायतकर्ता अशर्फी पासवान के भाई कैलाश पासवान ने 2015 में हेमंत झा (ब्राह्मण) के मकान निर्माण के लिए मजदूरी की थी, जिसके बदले करीब 2.47 लाख रुपये बकाया थे। बकाया राशि की मांग पर 31 जनवरी 2026 की रात दोनों पक्षों में झड़प हो गई। मारपीट में पासवान परिवार की महिलाएं और एक बच्ची घायल हुईं।
अशर्फी पासवान ने आरोप लगाया कि पूरे गांव के ब्राह्मणों ने मिलकर उनके परिवार पर हमला किया, जातिसूचक गालियां दीं और SC/ST समुदाय के खिलाफ अत्याचार किया। उन्होंने कुशेश्वरस्थान थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें FIR संख्या 22/2026 दर्ज हुई। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ SC/ST (Prevention of Atrocities) Act की गंभीर धाराएं लगाई गईं।
FIR में क्या लिखा है?
70 नामजद आरोपी: ज्यादातर ब्राह्मण समुदाय के लोग, जिनमें कई गांव से बाहर (दिल्ली, मुंबई आदि) मजदूरी या नौकरी कर रहे थे।
100-150 अज्ञात आरोपी: इससे FIR में पूरे गांव के ब्राह्मण समुदाय (लगभग 210 पुरुष) को कवर कर लिया गया।
आरोप: सामूहिक मारपीट, जातिसूचक अपमान, SC/ST समुदाय के खिलाफ अत्याचार, महिलाओं-बच्ची पर हमला।
पुलिस कार्रवाई और मौजूदा स्थिति:
अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
गांव में तनाव के चलते पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है, और ब्राह्मण समुदाय के पुरुष डर के मारे गांव छोड़कर चले गए हैं।
बिरौल DSP प्रभाकर तिवारी ने कहा कि यह मूल रूप से पैसे के लेन-देन का मामला है, लेकिन शिकायत के आधार पर SC/ST धाराएं जोड़ी गईं।
जांच जारी है, और पुलिस का कहना है कि केवल दोषियों पर कार्रवाई होगी, पूरे समुदाय पर नहीं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया:
नीतीश कुमार सरकार के एक दलित मंत्री ने कहा कि SC/ST एक्ट का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। केवल दोषी व्यक्ति पर कार्रवाई हो, पूरे गांव या समुदाय पर नहीं—वरना बड़ा समाज विरोध में आ जाएगा और सुप्रीम कोर्ट को फिर कानून बनाना पड़ सकता है।
सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर यह मामला वायरल है, जहां एक तरफ एक्ट के दुरुपयोग की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ दलित उत्पीड़न के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत बताई जा रही है।
यह घटना SC/ST एक्ट के प्रावधानों और उसके लागू होने के तरीके पर सवाल उठाती है, खासकर जब FIR में पूरे समुदाय को आरोपी बनाया जाता है। पुलिस जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।




































