नेपाल (Nepal) के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह (Balen Shah) ने सत्ता संभालते ही एक बड़ा कदम उठाया है। पीएम बनने के बाद उन्होंने भारत, चीन, अमेरिका समेत 17 देशों के राजदूतों की एक सामूहिक बैठक बुलाई। नेपाल के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब सभी विदेशी राजदूतों को एक साथ बुलाया गया। इससे पहले परंपरा यह थी कि हर नेपाली प्रधानमंत्री अलग-अलग राजदूतों से मिलते थे।
विदेश नीति में नई दिशा का संकेत
काठमांडू पोस्ट के अनुसार, इस बैठक के माध्यम से बालेन शाह ने यह संदेश दिया कि उनकी सरकार विदेश नीति पर मजबूत पकड़ रखना चाहती है। अब व्यक्तिगत स्तर की मुलाकातों के बजाय सरकार के स्तर पर देशों के साथ संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही, विदेश मंत्रालय ने सभी कैबिनेट मंत्रियों को नेपाल के राजनयिक आचार संहिता (2011) के बारे में भी जानकारी दी।
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मुलाकात में कौन-कौन शामिल था?
बैठक में भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस, जर्मनी, सऊदी अरब, कतर, इज़राइल, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, दक्षिण कोरिया, स्विट्ज़रलैंड, मिस्र और संयुक्त राष्ट्र के राजदूत शामिल थे। इसके अलावा, बालेन शाह ने 11 देशों के राजदूतों से अलग से भी मुलाकात की। सभी राजदूतों ने नेपाल की नई सरकार को समर्थन देने का आश्वासन दिया।
संतुलित विदेश नीति का इशारा
विश्लेषकों के मुताबिक, बालेन शाह ने भारत, चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के समय यह संकेत दिया कि उनकी सरकार किसी भी बड़े देश के पक्ष में झुकेगी नहीं। उनकी पार्टी ने भी साफ किया है कि नेपाल की विदेश नीति संतुलित होगी। यह कदम नेपाल में पिछले प्रधानमंत्रीों द्वारा अपनाई गई अलग-अलग मुलाकातों की परंपरा को तोड़ता है और नई रणनीतिक दिशा का संकेत देता है।















































