यूपी में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर समाजवादी पार्टी ने बड़ा आरोप लगाया है। सपा का कहना है कि इस प्रक्रिया में भारी धांधली की जा रही है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव खुले तौर पर कह रहे हैं कि चुनाव आयोग और भाजपा आपस में मिले हुए हैं। अखिलेश यादव का आरोप है कि सोची-समझी साजिश के तहत लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटने की तैयारी की जा रही है। यह काम जानबूझकर और संगठित तरीके से किया जा रहा है, ताकि चुनावों को प्रभावित किया जा सके।उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की नियमावली में जो नियम बने हैं, उनके अनुसार ऐसी गड़बड़ी करने वालों पर FIR दर्ज होनी चाहिए।इस पूरे मुद्दे पर अखिलेश यादव का रुख काफी सख्त है। वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरह आक्रामक अंदाज में इस लड़ाई को लड़ने की बात कह रहे हैं। सपा ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और हर स्तर पर विरोध करेगी।
सपा के आरोप क्या क्या हैं?-सपा का सबसे बड़ा आरोप है कि फर्जी व प्रिंटेड फॉर्म 7 का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। भाजपा कार्यकर्ता या उनसे जुड़े लोग पहले से छपे हुए फॉर्म 7 कंप्यूटर से भरकर जमा कर रहे हैं, जिसमें फर्जी हस्ताक्षर, EPIC डिटेल्स या नाम डाले जा रहे हैं, गलत या अमान्य मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक–एक व्यक्ति 100–100 फार्म 7 जमा कर रहा है। उदाहरण के तौर पर लखनऊ के सरोजनी नगर विधानसभा क्षेत्र में दशरथ नामक व्यक्ति के हस्ताक्षर से 100 से अधिक फॉर्म जमा हुए। इसी तरह सुल्तानपुर में नंदलाल के हस्ताक्षर बनाकर फर्जी तरीके से फार्म जमा किया गया, जबकि वह अनपढ़ है और अंगूठा लगाता है। अखिलेश यादव की मांग है कि SIR को संगठित अपराध में जोड़ दिया जाए। क्योंकि अधिकारी पर दबाव बनाया जा रहा है, चुनाव आयोग सुन नहीं रहा है।सपा का आरोप ये भी है कि फार्म 7 के जरिए सबसे अधिक मुस्लिमों के वोट काटे जा रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस कहते हैं- SIR को लेकर सपा पूरी तरह से आर-पार के मूड में है। अखिलेश यादव आक्रामक हैं। उन्हें जब फार्म 7 में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत मिली तो वो संसद छोड़कर लखनऊ आ गए और प्रेस कांफ्रेंस कर पूरे साक्ष्य रखें।अखिलेश यादव के लिए ये करो या मरो का सवाल है। वे ममता बनर्जी का जिक्र कर रहे हैं, जो SIR में गड़बड़ी के मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट गई हैं। वे अपने पीडीए प्रहरियों को पूरी तरह से अलर्ट रहने को भी कह रहे हैं। जरूरत पड़ी तो अखिलेश यादव पार्टी के नेताओं से राय मशविरा करने के बाद सुप्रीमकोर्ट का भी रुख करेंगे।
सपा हार की आशंका में कर रही बयानबाजी भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हीरो वाजपेयी के अनुसार, SIR चुनाव आयोग की ओर से कराया जा रहा है। समाजवादी पार्टी यूपी में पिछले चार चुनाव से लगातार हार रही है, इंडिया गठबंधन को बिहार चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। बिहार में अखिलेश यादव भी कई रैलियां करने गए थे, लेकिन वहां दाल नहीं गली।
क्या नाम कटवाना इतना आसान? लखनऊ में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में लंबे समय तक अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में सेवाएं दे चुके अतीक अहमद कहते हैं, किसी का भी नाम डिलीट करने की प्रक्रिया इतनी आसान नहीं रही है कि कोई भी फार्म 7 जमा कर दे और नाम कट जाए। उसके लिए ठोस सुबूत देना होता है, जो भी आपत्ति लगाई गई हो। साथ में संबंधित को भी नोटिस भेजा जाता है, जिसका नाम कटने के लिए आवेदन मिलता है। एक व्यक्ति केवल एक ही फार्म 7 का इस्तेमाल कर सकता है।
सपा के आरोपों पर क्या कहते हैं सीईओ?-राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा कहते हैं- समाजवादी पार्टी की ओर से फार्म 7 में गड़बड़ियों का जो ज्ञापन मिला था, उसकी जांच कराई जा रही है। शिकायत सही पाई गई तो कार्रवाई भी होगी। जहां तक फार्म 7 के दुरुपयोग की बात है, तो किसी का नाम कटवाना आसान नहीं है। जब भी फार्म 7 के माध्यम से कोई आपत्ति आती है, उसकी पूरी जांच की जाती है। ये भी देखा जाता है कि आपत्ति किसने की है? नाम काटे जाने के लिए ठोस सुबूत हैं या नहीं? मौजूदा समय में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के तहत 6 जनवरी से 6 फरवरी तक दावे और आपत्तियां मांगी गई हैं। इसमें अब तक करीब 70 हजार लोगों के नाम काटने के लिए आवेदन आए हैं।
INPUT-ANANYA MISHRA












































