लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री तथा स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने बाबर से जुड़े सवालों पर एक बार फिर पुराना नारा दोहराते हुए करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि बाबर एक आक्रांता और लुटेरा था, जिसका कोई सकारात्मक योगदान इतिहास में दर्ज नहीं है। जो लोग आज भी बाबर का महिमामंडन करते हैं, वे सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय दिया गया नारा आज भी प्रासंगिक है, ‘तेल लगाओ डाबर का, नाम मिटाओ बाबर का।’
बृजेश पाठक का पूरा बयान
बृजेश पाठक ने कहा , ‘बाबर एक आक्रांता था, लुटेरा था। यह तथ्य इतिहास में कोई झुठला नहीं सकता। बाबर का ऐसा कोई योगदान नहीं है जिसे याद किया जाए। जो लोग बाबर का महिमामंडन करते हैं, उनका उत्तर प्रदेश में कोई स्थान नहीं है। इसलिए जब बाबरी मस्जिद की घटना हुई थी, तब एक नारा दिया गया था ,’तेल लगाओ डाबर का, नाम मिटा दो बाबर का’। आप सब लोगों ने यह सुना था। बाबर भारतीय राजनीति के इतिहास में लुटेरे की संज्ञा से जाना जाता है। जो इस प्रकार का महिमामंडन करते हैं, वे सिर्फ तुष्टिकरण की पॉलिटिक्स करते हैं।
नारे की पृष्ठभूमि
‘तेल लगाओ डाबर का, नाम मिटाओ बाबर का’ नारा 1990 के दशक में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान बहुत लोकप्रिय हुआ था। यह नारा डाबर कंपनी के प्रसिद्ध तेल के विज्ञापन “तेल लगाओ डाबर का” से प्रेरित था और इसका इस्तेमाल बाबर के नाम को मिटाने के प्रतीक के रूप में किया गया। यह नारा उस समय कारसेवकों और हिंदू संगठनों के बीच खूब चला था।
बयान का संदर्भ
बृजेश पाठक का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में ‘नई बाबरी मस्जिद’ के निर्माण की घोषणा के बाद एक बार फिर बाबर और बाबरी मस्जिद का मुद्दा गरमा गया है। विभिन्न हिंदू संगठनों ने इसका विरोध किया है और उत्तर प्रदेश से भी कई कूच यात्राएं निकल रही हैं। ऐसे में उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में बाबर को आक्रांता और लुटेरा बताते हुए पुराने नारे को दोहराया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
सपा और कांग्रेस ने बृजेश पाठक के बयान को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का प्रयास बताया है।बीजेपी नेताओं ने उनका समर्थन किया और कहा कि बाबर का महिमामंडन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया पर यह नारा एक बार फिर ट्रेंड करने लगा है।
उपमुख्यमंत्री का संदेश
बृजेश पाठक ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश में अब सिर्फ विकास और राम की भक्ति की राजनीति चलेगी। जो लोग बाबर जैसे आक्रांताओं का महिमामंडन करते हैं, वे राज्य की मुख्यधारा से बाहर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर बनने के बाद अब कोई विवाद नहीं बचा है और लोग आगे बढ़ चुके हैं।













































