नोएडा के फेज-2 इलाके में पिछले तीन दिनों से चल रहा निजी कंपनियों के कर्मचारियों का धरना सोमवार को अचानक उग्र हो गया। वेतन वृद्धि और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर बड़ी संख्या में कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। हालात तब बिगड़ गए जब पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा भड़क उठा।
तोड़फोड़ और आगजनी से बढ़ा तनाव
प्रदर्शन के दौरान गुस्साए कर्मचारियों ने पुलिस के वाहनों में तोड़फोड़ की और कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। सेक्टर-84 क्षेत्र में कम से कम दो वाहनों को जला दिए जाने की सूचना है। इसके अलावा अलग-अलग स्थानों पर सड़क जाम कर विरोध तेज किया गया, जिससे पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया।
वेतन और महंगाई को लेकर नाराजगी
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा वेतन उनके लिए पर्याप्त नहीं है। उनका आरोप है कि कंपनियां न तो समय पर सैलरी देती हैं और न ही कामकाजी सुविधाओं में सुधार किया जा रहा है। इसी वजह से वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
प्रशासन की कार्रवाई और शांति की अपील
स्थिति बिगड़ने के बाद प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर हालात को नियंत्रित करने की कोशिश की। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया, जिसके बाद कई जगहों पर स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए चेतावनी दी है कि हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
नोएडा फेज-2 के होजरी कॉम्प्लेक्स (बी ब्लॉक और डी ब्लॉक) में 10 अप्रैल की सुबह करीब 9 बजे सैलरी को लेकर विवाद शुरू हुआ। इसकी वजह हरियाणा सरकार द्वारा 9 अप्रैल को अनस्किल्ड और स्किल्ड वर्कर्स के न्यूनतम वेतन में 35% की बढ़ोतरी की घोषणा थी। इसी के आधार पर नोएडा के कामगारों ने समान वेतन (पे पैरिटी) की मांग उठाई।
यह मामला किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि होजरी कॉम्प्लेक्स की करीब 10–12 गारमेंट एक्सपोर्ट कंपनियों के हजारों कर्मचारी इसमें शामिल हो गए। इनमें प्रमुख रूप से रिचा ग्लोबल एक्सपोर्ट्स, साहू एक्सपोर्ट्स, पैरामाउंट एक्सपोर्ट्स, रेनबो फैबआर्ट और अनुभव अपैरल्स जैसी कंपनियों का नाम सामने आया।
वर्कर्स की मुख्य मांगों में न्यूनतम सैलरी 18,000 से 20,000 रुपये करना, बेहतर सालाना वेतन वृद्धि, डबल ओवरटाइम का भुगतान, साप्ताहिक अवकाश और बोनस शामिल थे। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में स्थिति बिगड़ गई और पत्थरबाजी, वाहनों में तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस पर हमले की घटनाएं सामने आईं। यह हिंसा 3–4 दिनों तक जारी रही।
फिलहाल नोएडा प्रशासन ने कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि कर्मचारियों को समय पर वेतन दिया जाए, ओवरटाइम का भुगतान सुनिश्चित किया जाए और किसी तरह की छंटनी न की जाए। हालांकि, वर्कर्स की प्रमुख मांगें अभी भी पूरी नहीं हो सकी हैं। यह पूरा विवाद हरियाणा में वेतन बढ़ोतरी से शुरू होकर नोएडा तक फैल गया।
सरकार के फैसले और नए निर्देश
इससे पहले राज्य सरकार ने निजी कंपनियों के कर्मचारियों के हित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए थे, जिनमें दोगुना ओवरटाइम भुगतान, समय पर सैलरी और बोनस का सीधे बैंक खाते में भुगतान शामिल है। साथ ही प्रशासन ने साप्ताहिक अवकाश अनिवार्य करने और रविवार को काम कराने पर दोगुनी मजदूरी देने के निर्देश जारी किए हैं, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
(देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं.)













































