बलोचिस्तान
बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट यानी BLF ने हाल ही में एक बड़ा दावा किया है. संगठन का कहना है कि उसकी पूरी तरह महिलाओं वाली लड़ाकू यूनिट करिमा आर्म्ड असॉल्ट डिवीजन यानी KAAD और कुरबान यूनिट ने मिलकर 28 अक्टूबर को बलोचिस्तान के केच जिले के बुलेदा इलाके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ कार्रवाई की।
दावे के मुताबिक मैनाज बाजार के दोनों तरफ नाकाबंदी लगाई गई, वाहनों की जांच की गई और उसी दौरान आलंदूर स्थित सेना के कैंप पर भारी और स्वचालित हथियारों से हमला बोला गया. संगठन का दावा है कि इन झड़पों में कुल सात पाकिस्तानी जवान मारे गए।
यह दावा मुख्य रूप से BLF के अपने बयानों और संबंधित मीडिया स्रोतों पर आधारित है. पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ओर से इस घटना की आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत बयान सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे फिलहाल एकतरफा दावा ही माना जा रहा है।
बुलेदा क्षेत्र बलोचिस्तान के दक्षिणी हिस्से में स्थित है जहां अलगाववादी गतिविधियों की खबरें समय-समय पर आती रहती हैं. BLF के प्रवक्ता मेजर गवाहराम बलोच के बयान के अनुसार KAAD और कुरबान यूनिट के लड़ाकों ने मैनाज में प्रभावी नाकाबंदी की और वाहनों की जांच की. साथ ही आलंदूर कैंप पर रॉकेट और ग्रेनेड लॉन्चर समेत भारी हथियारों से हमला किया गया।
संगठन का कहना है कि कैंप के अंदर नुकसान पहुंचा और जब सेना की तरफ से पीछे के रास्ते से मदद पहुंचाने की कोशिश हुई तो उस पर भी जवाबी कार्रवाई की गई जिसमें और हताहत होने का दावा किया गया. एक फाइटर हाशुम उर्फ नूर बलोच को इस कार्रवाई में शहीद बताया गया।
सोशल मीडिया पर महिला लड़ाकों के नाकाबंदी और क्षेत्र में मौजूदगी के कुछ वीडियो भी प्रसारित हुए जिनमें स्थानीय लोगों के साथ मुलाकात के दृश्य दिखाए गए. ये तस्वीरें और दावे BLF की तरफ से किए जा रहे हैं।
पाकिस्तानी सुरक्षा स्रोतों की ओर से उसी इलाके में एक घटना की रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया कि आतंकवादी नाका लगाने की कोशिश कर रहे थे. सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में एक व्यक्ति मारा गया. दोनों पक्षों के बयानों में अंतर दिखता है. बलोचिस्तान जैसे सुदूर और संवेदनशील इलाके में ऐसी घटनाओं की पुष्टि करना मुश्किल होता है क्योंकि पहुंच सीमित होती है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पेश करते हैं।
KAAD यूनिट कब बनी और इसका महत्व
KAAD BLF की हालिया बनाई गई महिला लड़ाकू यूनिट है. इसका नाम करिमा बलोच के नाम पर रखा गया है जो बलोच छात्र संगठन की पूर्व अध्यक्ष रहीं. 2020 में कनाडा में रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई थी. संगठन महिलाओं को सिर्फ सहायक भूमिका में नहीं बल्कि सीधे सशस्त्र कार्रवाई में शामिल कर रहा है. इससे पहले भी KAAD ने कुछ हमलों का दावा किया था जिनमें सैन्य काफिलों पर हमले शामिल थे।
महिलाओं को लड़ाकू भूमिका में लाना अलगाववादी समूहों के लिए नया प्रचार हथियार बन गया है. इससे वे स्थानीय समर्थन बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करते दिखते हैं. बलोचिस्तान में लंबे समय से संसाधनों पर नियंत्रण, गायब होने की घटनाओं और आर्थिक शोषण जैसे मुद्दों को लेकर असंतोष है. अलगाववादी संगठन इन्हीं मुद्दों को उठाकर अपना संघर्ष जायज ठहराते हैं जबकि पाकिस्तान सरकार इन्हें आतंकवादी गतिविधियां मानती है और सुरक्षा अभियान चलाती रहती है।
अक्टूबर 2026 में BLF ने कई हमलों का दावा किया था जिनमें ग्वादर समेत अन्य इलाकों में बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों के हताहत होने की बात कही गई. ये दावे अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाते हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं होते. फिर भी ये घटनाक्रम बलोचिस्तान में सुरक्षा स्थिति की नाजुकता को रेखांकित करते हैं।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC जैसी परियोजनाएं भी इन इलाकों से गुजरती हैं इसलिए क्षेत्रीय स्थिरता अंतरराष्ट्रीय महत्व रखती है. महिला लड़ाकुओं की भागीदारी संघर्ष को नया आयाम दे रही है. यह सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन सकता है क्योंकि पारंपरिक समाज में महिलाओं की ऐसी भूमिका आम नहीं मानी जाती।
दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी और हिंसा का चक्र जारी है. आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. विकास, शिक्षा और रोजगार की कमी अलगाव की भावना को बढ़ावा देती है. समाधान के लिए सिर्फ सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं. राजनीतिक संवाद, स्थानीय असंतोष को दूर करने और मानवाधिकारों का सम्मान जरूरी है।
बुलेदा की यह घटना एक और उदाहरण है कि कैसे अलगाववादी संगठन अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं और महिला इकाइयों के जरिए अपनी छवि बदलने की कोशिश कर रहे हैं. दावों की सत्यता समय और स्वतंत्र जांच से ही सामने आएगी. फिलहाल यह घटना बलोचिस्तान की जटिल सुरक्षा पहेली का हिस्सा बनी हुई है।














