यूपी की 3 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 10 अप्रैल के बाद हो सकते हैं। चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, SIR के बीच उपचुनाव नहीं कराए जा सकते। इसलिए फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद ही चुनाव हो सकते हैं। दरअसल, चुनाव आयोग ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव का ऐलान किया था। लेकिन, यूपी के उपचुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की थी। इससे चर्चा शुरू हो गई कि 3 सीटों के उपचुनाव टल गए हैं।
बता दें कि घोसी, फरीदपुर और दुद्धी विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं। फरीदपुर सीट पर BJP अपने मौजूदा विधायक डॉ. श्याम बिहारी के बेटे को टिकट देने का संकेत दे चुकी है। वहीं, सपा भी घोसी और दुद्धी सीटों पर सहानभूति कार्ड खेलते हुए विधायकों के परिवार के सदस्यों को ही कैंडिडेट बनाने की तैयारी कर रही है। दोनों सीटों पर सपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।क्या आयोग चुनाव टाल सकता है? 3 सीटों पर भाजपा और सपा के कौन से चेहरे दावेदारी कर रहे? भाजपा और सपा की 3 सीटों पर तैयारी क्या है?
BJP नेता बंगाल चुनाव में व्यस्त
पश्चिम बंगाल चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद संगठन BJP नेताओं को वहां प्रचार के लिए भेजने की तैयारी कर रहा है। इनमें CM योगी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के भी नाम शामिल हैं। पार्टी का निचला कैडर क्षेत्र में जनसंपर्क कर रहा है। संभावित दावेदारों को भी संकेत दे दिया गया है कि वो लोगों के बीच पहुंचें और सियासी पकड़ मजबूत करें।
सपा नेता एक्टिव, उपचुनाव जल्दी चाह रहे
दूसरी तरफ, सपा के नेता तीनों सीटों पर उपचुनाव जल्दी करवाना चाहते हैं। माना जा रहा है कि 3 सीटों का उपचुनाव यूपी में 2027 के विधानसभा से पहले सेमीफाइनल की तरह होगा। चुनाव के नतीजे भले ही विधानसभा चुनाव पर ज्यादा असर नहीं डालेंगे। लेकिन, माहौल बनाने और बिगाड़ने के लिए भूमिका जरूर निभाएंगे। सपा नेताओं को अंदाजा है कि सवर्ण वोटर में भाजपा को लेकर नाराजगी है। 3 सीटों के चुनाव में सपा से फैक्टर को टेस्ट भी करना चाहती है।
बसपा एक्टिव नहीं, अगर कैंडिडेट उतारे तो नुकसान सपा को
चुनाव से पहले माना जा रहा है कि उपचुनाव में सपा और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होगा। बसपा अगर मैदान में उतरती है, तो भाजपा के मुकाबले सपा को ज्यादा नुकसान कर सकती है। इस वक्त तीनों सीटों पर बसपा का कैडर एक्टिव नहीं दिख रहा।
विधानसभा सीट क्यों खाली हुईं, दावेदार कौन हैं?
सपा विधायक के निधन से खाली हुई
मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट पर सपा के सुधाकर सिंह विधायक थे। उन्होंने यह सीट 2023 में सपा विधायक दारा सिंह चौहान के इस्तीफे के बाद हुए उपचुनाव में जीती थी। बाद में दारा सिंह चौहान सपा छोड़कर भाजपा में शामिल होकर मंत्री बन गए।
उनके इस्तीफे के बाद हुए उपचुनाव में सपा के सुधाकर सिंह ने 42 हजार 759 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी। सुधाकर सिंह के 20 नवंबर, 2025 को निधन के बाद फिर से यह सीट खाली हो चुकी है। सपा यहां सहानुभूति बटोरने के लिए सुधाकर सिंह के छोटे बेटे सुजीत सिंह का नाम घोषित कर चुकी है। भाजपा ने अभी कैंडिडेट डिक्लेयर नहीं किया है।
विजय सिंह गोंड के निधन से दूसरी बार उपचुनाव
2022 के विधानसभा चुनाव में सोनभद्र की दुद्धी (आरक्षित सीट) से भाजपा जीती थी। लेकिन, विधायक रामदुलार गोंड को रेप केस में सजा के चलते यह सीट खाली हो गई। 2024 के उपचुनाव में विजय सिंह ने भाजपा के श्रवण गोंड को हराया था। सपा विधायक विजय सिंह गोंड का 8 जनवरी, 2026 को निधन हो गया था। सपा ने संकेत दिया है कि इस सीट से विजय सिंह गोंड के परिवार के ही सदस्य को टिकट देगी। वहीं, भाजपा उपचुनाव में विजय सिंह गोंड को चुनौती देने वाले श्रवण कुमार पर ही दांव लगाने की तैयारी में है।
डॉ. श्याम बिहारी को कार्डिएक अरेस्ट के बाद सीट खाली हुई
बरेली की फरीदपुर (सुरक्षित) सीट से भाजपा विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल का 2 जनवरी, 2026 को निधन हो गया था। उन्हें कार्डिएक अरेस्ट हुआ था। 26 साल का बेटा ईशान ग्वाल दिल्ली में UPSC की तैयारी कर रहा है। पार्टी सहानुभूति बटोरने के लिए पत्नी या बेटे पर दांव खेल सकती है। हालांकि, वहां से एबीवीपी के अध्यक्ष जवाहर लाल और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रहे संजय सिंह भी दांवा ठोक रहे हैं। जबकि सपा अपने पूर्व विधायक विजय पाल सिंह को फिर से मैदान में उतार सकती है।
INPUT-ANANYA MISHRA












































