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PAC के 900 जवानों के डिमोशन के जिम्मेदार ADG स्थापना पर गिरी गाज, CM योगी ने पद से हटाया

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार करप्शन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाते हुए लगातार बड़े फैसले ले रही है। सीएम योगी किसी भी सरकारी कर्मचारी की प्रताड़ना को लेकर गंभीर रहने के साथ ही भ्रष्टाचार और कार्य में लापरवाही भी बर्दाश्त नहीं करते हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री ने पीएसी और नागरिक पुलिस से आए कांस्टेबल व सब इंस्पेक्टर को प्रमोशन न देने के मामले में जिम्मेदार माने जा रहे एडीजी स्थापना पीयूष आनंद (ADG Piyush Anand) का तबादला कर दिया है।


प्रदेश सरकार ने शनिवार को आईपीएस अधिकारियों के ताबदलों की लिस्ट जारी की है। इसके तहत दो आईपीएस अधिकारियों के ताबदले की लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में एडीजी स्थापना पद से पीयूष आनन्द को हटा दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी के बाद पीयूष आनन्द एडीजी स्थापना के पद से हटाये गए हैं।


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वहीं, अब पीयूष आनन्द के स्थान पर संजय सिंघल को एडीजी स्थापना बनाया गया और पीयूष आनन्द को एडीजी रेलवे बनाया गया है। बता दें कि सीएम योगी ने इन जवानों का डिमोशन किए जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने डीजीपी अवनीश अवस्थी को निर्देश दिए थे कि इन जवानों को तुरंत प्रमोट किया जाए।


ये है पूरा मामला

दरअसल, पीएसी से नागरिक पुलिस में आए जवानों को प्रमोशन मांगने पर उन्हें मूल काडर पीएसी में भेज दिया गया। ऐसे 896 पुलिसकर्मियों को डिमोट करते हुए वापस किया गया, जबकि 22 आरक्षियों को आरक्षी के ही पद पर वापस भेजा गया। डीजीपी मुख्यालय से जारी इस आदेश से रिवर्ट होने वाले पुलिसकर्मियों में भारी रोष देखने को मिला था।


बता दें कि 2008 से पूर्व पीएसी से नागरिक पुलिस में स्थानांतरण हो जाया करता था। इसके तहत कुल 932 पुलिसकर्मी सशस्त्र पुलिस बल से नागरिक पुलिस में आए। उनमें से 890 आरक्षी से मुख्य आरक्षी के पद पर प्रोन्नत हो गए। 6 को उप निरीक्षक के पद पर प्रोन्नति मिली, 22 आरक्षी के पद पर ही रहे और 14 की मृत्यु हो गई। उप निरीक्षक पद पर जिन्हें प्रोन्नति नहीं मिली उन्होंने अदालत का रुख किया।


अदालत ने इस पर डीजीपी मुख्यालय से जवाब मांगा। वहीं, डीजीपी मुख्यालय ने इस स्थानांतरण के आदेश को ही गलत बता दिया। कहा कि पीएसी व नागरिक पुलिस दो अलग-अलग संवर्ग हैं। पूर्व में पीएसी से कुछ लोगों की ड्यूटी नागरिक पुलिस में लगाई गई थी। जिसे संवर्ग परिवर्तन नहीं कहा जा सकता। क्योंकि इसका न तो कोई शासनादेश है और न ही किसी नियमावली में प्राविधान।


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