लखनऊ, 24 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश कांग्रेस को आगामी पंचायत चुनावों और भविष्य के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले बड़ा राजनीतिक धक्का लगा है। वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और पश्चिमी उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने शनिवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके साथ उनके दर्जनों (रिपोर्ट्स में 73 या इससे अधिक) समर्थकों ने भी इस्तीफा पत्र सौंपा है। यह घटना यूपी कांग्रेस के लिए न केवल संगठनात्मक नुकसान है, बल्कि पश्चिमी यूपी के मुस्लिम और दलित वोट बैंक पर भी गहरा असर डाल सकती है, जहां सिद्दीकी की मजबूत पकड़ मानी जाती थी।
इस्तीफे का पूरा विवरण
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपना इस्तीफा पत्र कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, यूपी प्रभारी अविनाश पांडेय और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को भेजा है। इस्तीफे में उन्होंने पार्टी की कार्यशैली, आंतरिक माहौल और खुद को मिल रही भूमिका पर गहरा असंतोष जताया है। वे खुद को एक ग्रासरूट कार्यकर्ता बताते हैं, लेकिन कहते हैं कि पार्टी ने उनका “सही इस्तेमाल” नहीं किया। उन्होंने “अनिवार्य कारणों” (unavoidable reasons) का हवाला देते हुए फैसला बताया है।
सिद्दीकी ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनका फैसला पक्का है और वे वापस नहीं लौटेंगे। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय उन्हें मनाने के लिए उनके निवास पर पहुंचने वाले हैं, लेकिन सिद्दीकी का कहना है कि अब कुछ नहीं बदलेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनके समर्थक हर जिले में सैकड़ों-हजारों की संख्या में हैं, और अभी सिर्फ 73 लोगों की लिस्ट दी गई है—यानी और लोग भी जा सकते हैं।
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राजनीतिक सफर का बैकग्राउंड
– नसीमुद्दीन सिद्दीकी का जन्म 4 जून 1959 को हुआ। वे पहली बार 1991 में विधायक बने थे।
– वे बहुजन समाज पार्टी (BSP) के प्रमुख चेहरों में से एक थे और मायावती के बहुत करीबी माने जाते थे। बसपा सरकार (2007-2012) में वे मंत्री रहे।
– 2017 यूपी विधानसभा चुनाव में BSP की हार के बाद पार्टी ने उन्हें एंटी-पार्टी एक्टिविटी के आरोप में 10 मई 2017 को निकाल दिया।
– 2018 में वे कांग्रेस* में शामिल हुए, जहां पार्टी ने उन्हें पश्चिमी यूपी का प्रांतीय अध्यक्ष बनाया और मुस्लिम समुदाय के प्रमुख चेहरे के रूप में प्रमोट किया। वे AICC (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) के सदस्य भी थे।
अब आगे क्या? अटकलें और संभावनाएं
इस्तीफे के तुरंत बाद यूपी की राजनीति में हलचल मच गई है। सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार:
– सबसे मजबूत अटकल आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) में शामिल होने की है, जिसके प्रमुख चंद्रशेखर आजाद हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सिद्दीकी चंद्रशेखर से हाथ मिला सकते हैं।
– दूसरी प्रमुख चर्चा बसपा में घर वापसी की है। सूत्र बता रहे हैं कि दिल्ली में बसपा के एक कद्दावर नेता से उनकी कई दौर की मुलाकात हुई थी, जिसके नतीजे में यह इस्तीफा आया।
– सिद्दीकी ने खुद BJP में जाने या बसपा में तुरंत वापसी की अफवाहों को खारिज किया है, लेकिन कहा है कि समर्थकों से मशविरा करके अगला कदम तय होगा। वे जल्द ही अपनी नई पार्टी या गठबंधन की घोषणा कर सकते हैं।
कांग्रेस पर असर
यह इस्तीफा यूपी कांग्रेस के लिए तब आया है, जब पार्टी राज्य में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पश्चिमी यूपी में सिद्दीकी की पकड़ से मुस्लिम वोटरों में असर पड़ सकता है, जो पहले से ही पार्टी से नाराज चल रहे हैं। कांग्रेस अब इस नुकसान की भरपाई के लिए नए चेहरों को प्रमोट कर सकती है, लेकिन यह झटका आसानी से झेल पाना मुश्किल लग रहा है।
यूपी की सियासत में यह घटना अगले कुछ दिनों में और बड़े बदलाव ला सकती है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी का अगला कदम क्या होगा—यह देखना दिलचस्प होगा!
INPUT-ANANYA MISHRA











































