मध्य प्रदेश। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी ने ऐसा कहर बरपाया कि घर-घर बीमारी पहुंच गई और कई परिवारों की खुशियाँ उजड़ गईं। इस गंभीर मामले में अब राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और दो हफ्ते के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
NHRC ने अपने बयान में साफ कहा है कि स्थानीय लोग लंबे समय से दूषित पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज किया—और इसी लापरवाही ने जानलेवा रूप ले लिया।
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कैसे हुआ पानी दूषित?
जांच में सामने आया है कि भागीरथपुरा में पेयजल की मुख्य पाइपलाइन में लीकेज था। हैरान करने वाली बात यह है कि यह लीकेज एक सार्वजनिक शौचालय के ठीक नीचे पाया गया, जिससे सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट ने पानी के दूषित होने की पुष्टि कर दी है।
आंकड़े डराने वाले
- अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि
- 1,400 से ज्यादा लोग बीमार,
- 200 अस्पताल में भर्ती,
- 1 मरीज वेंटिलेटर पर
- 1,714 घरों के सर्वे में 8,571 लोगों की जांच,
- 338 लोगों में उल्टी-दस्त के लक्षण, जिन्हें घर पर प्राथमिक उपचार दिया गया
मुख्यमंत्री की हाई-लेवल बैठक, मुआवजे का ऐलान
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर में उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल रहे।
मुख्यमंत्री ने:
- मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये की सहायता,
- सभी प्रभावितों को मुफ्त इलाज,
- और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
- सवाल जो सिस्टम से जवाब मांगते हैं
- जब शिकायतें पहले से थीं, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- क्यों शौचालय के नीचे से गुजर रही पाइपलाइन की जांच समय रहते नहीं हुई?
और क्या यह हादसा सिर्फ “लीकेज” था या प्रशासनिक लापरवाही की कीमत?
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इंदौर की यह घटना सिर्फ एक इलाके की कहानी नहीं, बल्कि शहरी व्यवस्थाओं की खामियों पर बड़ा सवाल है। अब सबकी निगाहें NHRC की रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्योंकि साफ पानी सिर्फ सुविधा नहीं, जीने का अधिकार है।
INPUT- PRIYANSHU PANDEY
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