छत्तीसगढ़ में नक्सलियों पर निर्णायक प्रहार: मुठभेड़ों में 14 ढेर, मोस्ट वांटेड कमांडर बारसे देवा ने साथियों संग डाले हथियार

मध्य प्रदेश : नए साल की शुरुआत छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में नक्सलवाद के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं रही। एक ओर सुकमा और बीजापुर जिलों में हुई दो अलग-अलग मुठभेड़ों में सुरक्षा बलों ने 14 नक्सलियों को ढेर कर दिया, वहीं दूसरी ओर माओवादी संगठन की सबसे खतरनाक सैन्य इकाई मानी जाने वाली PLGA बटालियन नंबर-1 के कमांडर बारसे देवा उर्फ साइनाथ ने अपने 15–17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इन दोनों घटनाओं ने नक्सली नेटवर्क की रीढ़ तोड़कर रख दी है।

जंगल में गरजे हथियार, 14 नक्सलियों का अंत

शनिवार सुबह सुकमा जिले के किस्टाराम इलाके में DRG और अन्य सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी। खुफिया सूचना के आधार पर जंगलों में सर्चिंग के दौरान नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसका जवानों ने मुंहतोड़ जवाब दिया। कई घंटे चली मुठभेड़ में 12 नक्सली मारे गए , जिनमें कोंटा एरिया कमेटी का सचिव मंगडू भी शामिल है। मौके से AK-47, INSAS राइफल समेत भारी मात्रा में ऑटोमैटिक हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया।

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सर्च ऑपरेशन अब भी जारी

इसी दिन पड़ोसी बीजापुर जिले में तड़के करीब 5 बजे से रुक-रुक कर फायरिंग होती रही। यहां DRG की टीम ने 2 नक्सलियों को मार गिराया । दोनों के शव और हथियार बरामद कर लिए गए हैं। बीजापुर के एसपी जितेंद्र यादव ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षा कारणों से ऑपरेशन से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं। दोनों जिलों में सर्च ऑपरेशन अब भी जारी है और और नक्सलियों के मारे जाने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।

मोस्ट वांटेड कमांडर का सरेंडर, संगठन को दूसरा बड़ा झटका

नक्सलियों को सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब 25 लाख रुपये के इनामी और PLGA बटालियन-1 के कमांडर बारसे देवा उर्फ साइनाथ ने तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। देवा दिवंगत नक्सली नेता माडवी हिडमा का करीबी रहा है और हिडमा की मौत के बाद उसने इस बटालियन की कमान संभाली थी, जिसे नक्सलियों का आखिरी मजबूत सैन्य दस्ता माना जाता था।

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सूत्रों के मुताबिक, देवा अपने 15–17 साथियों के साथ छत्तीसगढ़–तेलंगाना सीमा पार कर मुलुगु क्षेत्र पहुंचा और तेलंगाना के DGP बी. शिवाधार रेड्डी के समक्ष हथियार डाल दिए। सभी को हैदराबाद लाया गया है, जहां आज दोपहर 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरी जानकारी साझा की जाएगी। कुछ रिपोर्ट्स में साथियों की संख्या 20 बताई गई है, लेकिन आधिकारिक सूत्र 15–17 कैडरों की पुष्टि कर रहे हैं।

नक्सलवाद पर निर्णायक असर

इन दो बड़ी कार्रवाइयों ने केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने के लक्ष्य को और मजबूती दी है। वर्ष 2025 में ही छत्तीसगढ़ में 285 नक्सली मारे गए थे, और 2026 की शुरुआत में इस तरह की बड़ी सफलता से साफ है कि सुरक्षा बलों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बारसे देवा के सरेंडर से PLGA बटालियन-1 नेतृत्वविहीन हो गई है, जिससे बस्तर में नक्सली आंदोलन को निर्णायक झटका लगा है।

सुरक्षा बलों ने साफ किया है कि अभियान पूरी ताकत से जारी रहेगा और शेष नक्सलियों से अपील की है कि वे हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटें। बस्तर के जंगलों में अब यह संदेश गूंज रहा है—हिंसा का रास्ता खत्म, विकास की राह शुरू।

INPUT- PRIYANSHU PANDEY

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