उत्तराखंड (Uttarakhand) की पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में मौजूद उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड को पूरी तरह समाप्त करने का फैसला लिया गया है। इसके स्थान पर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (Uttarakhand State Minority Education Authority) का गठन किया गया है। यह बदलाव 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद 4 फरवरी 2026 को संबंधित अधिसूचना जारी कर दी गई है। मुख्यमंत्री धामी ने इसे अल्पसंख्यक बच्चों को मुख्यधारा शिक्षा से जोड़ने, गुणवत्ता बढ़ाने और पारदर्शिता लाने का कदम बताया है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है जहां मदरसा बोर्ड को खत्म कर सभी अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं को एक समान प्राधिकरण के अधीन लाया जा रहा है।
फैसले के मुख्य बिंदु
धामी सरकार ने मदरसा बोर्ड को समाप्त करने के लिए निम्नलिखित प्रमुख बदलाव किए हैं:
- उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड का कार्यकाल 30 जून 2026 को समाप्त हो जाएगा।
- 1 जुलाई 2026 से सभी मदरसे और अन्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाएं (मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई, पारसी आदि) नए राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अंतर्गत आएंगी।
- मान्यता और संबद्धता अब उत्तराखंड बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से दी जाएगी।
- पाठ्यक्रम और सिलेबस नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) के अनुरूप अनिवार्य रूप से लागू होगा।
- सभी अल्पसंख्यक संस्थाओं में NCERT/राज्य पाठ्यपुस्तकें अनिवार्य होंगी।
- प्राधिकरण में विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो संस्थाओं की निगरानी, मान्यता और सुधार के लिए जिम्मेदार होंगे।
सरकार का तर्क और उद्देश्य
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह फैसला अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए है। मुख्य उद्देश्य:
- अल्पसंख्यक शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ना।
- गुणवत्ता और आधुनिक शिक्षा सुनिश्चित करना।
- किसी भी प्रकार के भेदभाव को खत्म करना।
- पारदर्शिता और जवाबदेही लाना।
- NEP 2020 के लक्ष्यों को पूरा करना।
सरकार का दावा है कि मदरसा बोर्ड के तहत कई संस्थाओं में आधुनिक विषयों (विज्ञान, गणित, अंग्रेजी आदि) की कमी थी, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा था। नए प्राधिकरण से सभी बच्चों को समान अवसर मिलेंगे।
प्रभावित संस्थाएं और छात्र
राज्य में लगभग 400-500 मदरसे और अन्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाएं हैं, जो इस बदलाव से सीधे प्रभावित होंगी। इनमें पढ़ने वाले हजारों छात्रों को अब राज्य बोर्ड की मान्यता प्राप्त शिक्षा मिलेगी। सरकार ने आश्वासन दिया है कि कोई भी संस्था या छात्र प्रभावित नहीं होगा। मौजूदा सत्र में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन 2026-27 सत्र से नई व्यवस्था लागू होगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
- BJP का पक्ष: इसे शिक्षा सुधार और राष्ट्रीय एकीकरण का बड़ा कदम बताया जा रहा है। भाजपा नेता इसे उत्तराखंड की प्रगतिशील नीति का प्रतीक बता रहे हैं।
- विपक्ष का रुख: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल अभी इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ संगठन इसे अल्पसंख्यकों के धार्मिक शिक्षा के अधिकार पर हमला बता सकते हैं।
- अल्पसंख्यक संगठन: कुछ संगठनों ने सतर्कता जताई है, जबकि अन्य ने कहा कि अगर गुणवत्ता शिक्षा मिलेगी तो वे इसका स्वागत करेंगे।
धामी सरकार का यह फैसला उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन है। जुलाई 2026 से लागू होने वाली नई व्यवस्था से अल्पसंख्यक शिक्षा मुख्यधारा से जुड़ेगी और NEP के अनुरूप होगी। सरकार ने इसे ‘ऐतिहासिक’ और ‘समावेशी’ बताया है।













































