अयोध्या में अतिक्रमण हटाने और सड़क चौड़ीकरण को लेकर चल रही बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सियासत तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के विरोध के बाद उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उन पर तीखा हमला बोला है। ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा सरकार के दौरान अयोध्या और काशी के विकास को प्राथमिकता नहीं दी गई।
जो राम का नहीं हुआ, वो कृष्ण का नहीं हो सकता
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें पहले यह बताना चाहिए कि मथुरा को लेकर उनका क्या रुख है। उन्होंने कहा कि वह पहले भी कह चुके हैं कि “जो राम का नहीं हुआ, वो कृष्ण का नहीं हो सकता। पाठक ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के समय तुष्टीकरण की राजनीति अपने चरम पर थी और अयोध्या-काशी के विकास कार्यों को रोकने का काम किया गया।
अयोध्या-काशी के विकास को लेकर सपा पर निशाना
ब्रजेश पाठक ने कहा कि अखिलेश यादव मौजूदा समय में अयोध्या और काशी में हो रहे विकास कार्यों पर सवाल उठाते हैं, लेकिन उन्हें अपने कार्यकाल का भी हिसाब देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार अयोध्या को विश्वस्तरीय शहर के रूप में विकसित करने के लिए बड़े स्तर पर काम कर रही है। इसी क्रम में 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण का काम चल रहा है, जबकि पाठक ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान इस मार्ग पर प्रतिबंध लगाने तक की कोशिश की गई थी।
सपा को सनातन संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं
उपमुख्यमंत्री ने सपा पर धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी का सनातन संस्कृति से कोई सरोकार नहीं है और पार्टी की राजनीति मुस्लिम तुष्टीकरण के इर्द-गिर्द रही है। पाठक ने कहा कि सपा लगातार अयोध्या के विकास कार्यों में बाधा डालने के रास्ते तलाशती रही है।
अपराध और चुनाव आयोग के मुद्दे पर भी घेरा
ब्रजेश पाठक ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी समाजवादी पार्टी को घेरा। उन्होंने सपा को गुंडों और अपराधियों की पक्षधर पार्टी बताते हुए दावा किया कि अपराधी और माफिया इस उम्मीद में हैं कि अखिलेश यादव सत्ता में आएंगे तो उन्हें फिर से बाहर आने का मौका मिलेगा। वहीं, चुनाव आयोग को लेकर अखिलेश यादव के आरोपों पर पाठक ने कहा कि सपा चुनाव जीतने पर संवैधानिक संस्थाओं को सही मानती है, जबकि हार के बाद उन्हीं संस्थाओं पर सवाल उठाती है। उन्होंने कहा कि भाजपा निष्पक्ष राजनीति और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान की पक्षधर रही है।

















































