लखनऊ के एक होटल में आयोजित यूपी फार्मा कॉन्क्लेव 1.0 के उद्घाटन समारोह में CM योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य फोकस फार्मास्यूटिकल सेक्टर में निवेश, रिसर्च और मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना था। इस दौरान सरकार ने 11 बड़ी कंपनियों के साथ MoU साइन किए, जिनके तहत नई दवाओं, वैक्सीन और मेडिकल उपकरणों पर संयुक्त रिसर्च और प्रोडक्शन होगा। योगी ने कहा कि यूपी अब फार्मा हब बनेगा और निवेश से लाखों रोजगार पैदा होंगे।
लेकिन कार्यक्रम में सबसे ज्यादा सुर्खियां योगी के एनकाउंटर और कानून-व्यवस्था पर दिए गए बयानों ने बटोरीं। योगी ने कहा,2012 से 2017 के बीच यूपी में 900 से ज्यादा दंगे हुए। ऐसा कोई शहर नहीं था, जिसने कर्फ्यू का दौर न देखा हो। कोई व्यापारी ऐसा नहीं था, जिसने गुंडा टैक्स न दिया हो। अपराध हावी था। ऐसे वक्त पर मुझे दायित्व सौंपा गया। हमने तय किया, जीरो टॉलरेंस।
उन्होंने आगे कहा, अगर अपना व्यक्ति भी गलत करेगा तो उसके लिए भी वही कानून लागू होगा, जो माफिया और अपराधी के लिए है। बहुत बार लोग टिप्पणी करते हैं कि पुलिस ने गोली क्यों मार दी। अगर पुलिस गोली न मारे तो क्या खाए। दोनों काम एक साथ नहीं चल सकते। अगर उस अपराधी के पास गोली चलाने की आजादी है तो हमने भी पुलिस को पिस्तौल दी है। उन्हें ट्रेनिंग ही इस बात की दी गई है कि अपराधी जिस भाषा में समझे, उस भाषा में समझाने का काम करे।
योगी का यह बयान यूपी में एनकाउंटर पॉलिसी के समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस छेड़ रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में 200 से ज्यादा एनकाउंटर हो चुके हैं, जिनमें कई माफिया और गैंगस्टर मारे गए। सरकार इसे ‘एंटी-क्राइम’ और ‘माफिया मुक्त यूपी’ की सफलता बताती है। लेकिन विपक्ष (सपा, कांग्रेस) इसे ‘फर्जी एनकाउंटर’ और ‘एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग’ करार देता है। योगी के “पुलिस गोली न मारे तो क्या खाए वाले बयान पर सोशल मीडिया पर मीम्स और ट्रोल्स का दौर शुरू हो गया है।
कार्यक्रम में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने भी फार्मा सेक्टर को बढ़ावा देने पर जोर दिया। MoU के तहत कंपनियां यूपी में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाएंगी, जिससे राज्य की इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा। योगी ने कहा कि यूपी अब ‘इन्वेस्टर्स फ्रेंडली’ राज्य है और कानून-व्यवस्था मजबूत होने से निवेश बढ़ा है।
योगी के बयान पर प्रतिक्रियाएं:
- BJP समर्थक इसे ‘सख्त मुख्यमंत्री’ का सबूत बता रहे हैं।
- सपा प्रवक्ता ने कहा कि यह बयान पुलिस को खुली छूट देने वाला है।
- मानवाधिकार संगठनों ने इसे चिंताजनक बताया।
यह बयान यूपी की कानून-व्यवस्था को लेकर योगी की पुरानी लाइन को दोहराता है – जीरो टॉलरेंस, जीरो बुलेट प्रूफ। क्या यह बयान एनकाउंटर पर नए विवाद को जन्म देगा या सरकार की इमेज को और मजबूत करेगा? समय बताएगा, लेकिन योगी का यह संदेश साफ है – अपराधी की भाषा में ही जवाब दिया जाएगा।











































