डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के अनुरोध पर घूसखोर पंडत शीर्षक हटाने के निर्देश

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ. ब्रजेश पाठक ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ‘पंडित’ शब्द की गरिमा और ब्राह्मण समाज के राष्ट्र निर्माण में योगदान पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि एक ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रस्तावित फिल्म “घूसखोर पंडत” के शीर्षक को लेकर उन्होंने भारत सरकार से अनुरोध किया था, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया और शीर्षक हटाने के सख्त निर्देश जारी किए।

ब्रजेश पाठक का पूरा बयान

“पंडित शब्द वद्वता और त्याग का प्रतीक रहा है। ब्राह्मणों का योगदान राष्ट्र निर्माण में प्रथम पंक्ति में रहा है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ब्राह्मण समाज को अनुचित तरीके से इंगित कर आगामी समय में रिलीज को प्रस्तावित ‘घूसखोर पंडत’ शीर्षक फिल्म जो कि वर्ग विशेष की भावनाओं को आहत करने वाली थी, जिसके संबंध में मेरे द्वारा भारत सरकार से फिल्म के शीर्षक को हटाने का अनुरोध किया गया था।

भारत सरकार ने मेरे अनुरोध को स्वीकार करते हुए ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इस शीर्षक को हटाने के सख्त निर्देश जारी करते हुए भविष्य में किसी भी वर्ग विशेष पर इस तरह की अनुचित टिप्पणी को फिल्मों, वेब सीरीज एवं अन्य माध्यमों में अमल में न लाए जाने के निर्देश दिए हैं, जिससे सामाजिक विद्वेष पनपता हो।

मैं  भारत सरकार का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।”

‘पंडित’ शब्द की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता
डॉ. ब्रजेश पाठक ने इस बयान के माध्यम से स्पष्ट किया कि ‘पंडित’ शब्द भारतीय संस्कृति में विद्वान, ज्ञानी, शास्त्रों में पारंगत और त्यागी व्यक्तियों के लिए प्रयुक्त होने वाला सम्मानसूचक शब्द है। उन्होंने जोर दिया कि इस शब्द का गलत या अपमानजनक प्रयोग किसी भी रूप में उचित नहीं है, क्योंकि यह न केवल ब्राह्मण समाज की, बल्कि पूरे भारतीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ा है।

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फिल्म शीर्षक पर सरकार की कार्रवाई

उपमुख्यमंत्री के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने त्वरित संज्ञान लेते हुए ओटीटी प्लेटफॉर्म को निर्देश दिए कि प्रस्तावित फिल्म का शीर्षक “घूसखोर पंडत” हटा दिया जाए। साथ ही सरकार ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि भविष्य में किसी भी जाति, वर्ग या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले शीर्षक, संवाद या सामग्री का प्रयोग फिल्मों, वेब सीरीज या अन्य मीडिया में नहीं किया जाए। यह कदम सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक सम्मान को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

समाज में प्रतिक्रिया और महत्व

ब्रजेश पाठक के इस बयान और सरकार की कार्रवाई की समाज के विभिन्न वर्गों में सराहना हो रही है। कई लोग इसे भाषा की गरिमा, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और सामाजिक सौहार्द की रक्षा के रूप में देख रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को उठाकर न केवल ब्राह्मण समाज की भावनाओं का सम्मान किया, बल्कि सभी वर्गों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का संदेश भी दिया है।

INPUT-ANANYA MISHRA

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