समाजवादी पार्टी के संरक्षक और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा आईपीएस अमिताभ ठाकुर को फोन पर धमकी देने के मामले में लखनऊ सीजेएम ने बड़ा फैसला सुनाया। 10 जुलाई 2015 के इस मामले में लखनऊ सीजेएम ने पुलिस द्वारा लगाई गयी फाइनल रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया है। वहीं, सीनियर आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने फाइनल रिपोर्ट लगाने वाले पुलिस अफसर पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।
मुलयाम के राजनीतिक रसूख को देख लगा दी फाइनल रिपोर्ट
दरअसल, पुलिस द्वारा लगाई गयी फाइनल रिपोर्ट के विरुद्ध अमिताभ ठाकुर ने प्रतिवेदन देकर कहा कहा था कि आरोपी मुलायम सिंह यादव ने पुलिस को दिए अपने बयान में माना था कि कथित वायरल ऑडियो में आवाज उन्हीं की है। अमिताभ ठाकुर ने कोर्ट में कहा कि मामले की जांच करने वाले पुलिस अफसर ने मुलायम का राजनीतिक रसूख देखते हुए फाइनल रिपोर्ट लगाई है। यही वजह है कि अमिताभ की इस दलील को कोर्ट ने मानते हुए फाइनल रिपोर्ट खारिज करने का फैसला सुनाया है।
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सीजेएम ने सोमवार को मामले को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश देते हुए वादी को 11 फरवरी को बयान दर्ज कराने को कहा है। बता दें कि इससे पहले लखनऊ पुलिस ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आनंद प्रकाश सिंह की अदालत में इस मामले में अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करते हुए अदालत से आग्रह किया कि वह शिकायतकर्ता आईपीएस अफसर ठाकुर के खिलाफ मुलायम के विरुद्ध ‘‘झूठी’’ प्राथमिकी दर्ज कराने के आरोप में कार्यवाही का आदेश दें। अगर ठाकुर के खिलाफ आरोप सही पाए गए तो उन्हें छह माह की कैद और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा हो सकती है। इसके पूर्व, बाजार खाला के पुलिस क्षेत्राधिकारी अनिल कुमार यादव ने अदालत में अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि जांच में इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि मुलायम ने आईपीएस अफसर ठाकुर को धमकाया था।
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गौरतलब है कि अमिताभ ठाकुर ने 10 जुलाई 2015 को हजरतगंज कोतवाली में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उन्हें फोन पर धमकी दी थी। पुलिस ने इस मामले में पहली बार अक्टूबर 2015 में अंतिम रिपोर्ट लगाई थी लेकिन ठाकुर ने इस पर सवाल उठाते हुए इसे चुनौती दी थी। अदालत ने 20 अगस्त 2016 को इस अंतिम रिपोर्ट को खारिज करते हुए पुलिस को मामले की आगे जांच करने के आदेश दिए थे। पुलिस ने मुलायम की आवाज का नमूना लेने की कोशिश की थी लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया था। हालांकि बाद में उन्होंने स्वीकार किया था कि कॉल रिकॉर्डिंग में उन्हीं की आवाज है। मुलायम ने कहा था कि उन्होंने एक बुजुर्ग होने के नाते ठाकुर से बात की थी और उनका इरादा उन्हें धमकाने का नहीं था।
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