कानपुर रजिस्ट्री विभाग में आयकर का बड़ा सर्वे: जोन-3 सिविल लाइंस कार्यालय में 3500 करोड़ की हेराफेरी का खुलासा

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में रजिस्ट्री विभाग (स्टांप एवं पंजीकरण विभाग) एक बार फिर आयकर विभाग की सख्त कार्रवाई के दायरे में आ गया है। गुरुवार को आयकर विभाग ने जोन-3 के सिविल लाइंस स्थित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में अचानक सर्वे किया, जिसमें बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और टैक्स चोरी का खुलासा हुआ। शुरुआती जांच में लगभग 3500 करोड़ रुपये की संपत्ति रजिस्ट्रियों में हेराफेरी और विसंगतियां पाई गई हैं, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ है।

सर्वे में क्या-क्या फर्जीवाड़ा सामने आया?

आयकर विभाग की टीम ने वर्ष 2020 से 2025 तक की हजारों रजिस्ट्रियों की बारीकी से जांच की। मुख्य खुलासे इस प्रकार हैं:
फर्जी पैन कार्ड और गलत मोबाइल नंबर: लगभग 1000 से अधिक रजिस्ट्रियों में फर्जी या मनगढ़ंत पैन नंबर डाले गए थे, ताकि आयकर से बचा जा सके। कई मामलों में मोबाइल नंबर भी गलत या नकली पाए गए।
स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री मूल्य में हेराफेरी: संपत्ति के बाजार मूल्य से काफी कम मूल्य दिखाकर स्टांप शुल्क चोरी की गई। इससे सरकार को सैकड़ों करोड़ का टैक्स नुकसान हुआ।
अधूरे और संदिग्ध दस्तावेज: कई रजिस्ट्रियों में दस्तावेज अधूरे थे, जबकि कुछ में बेनामी लेन-देन के संकेत मिले। कुल मिलाकर 2500 से 3500 करोड़ रुपये की विसंगतियां पकड़ी गईं, जिसमें टैक्स चोरी का अनुमान 500-800 करोड़ तक है।

कुछ रजिस्ट्रियों में बिक्री मूल्य को जानबूझकर कम दिखाया गया, जबकि वास्तविक लेन-देन ज्यादा था। यह “अंडर-वैल्यूएशन” का क्लासिक मामला है।

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कार्रवाई और आगे की जांच

आयकर विभाग के सहायक निदेशक विमलेश राय के नेतृत्व में टीम ने छापेमारी की, जो कई घंटों तक चली। विभाग ने संबंधित अधिकारियों और संलिप्त व्यक्तियों से दस्तावेज जब्त किए हैं। रजिस्ट्री विभाग ने भी अपनी ओर से जांच शुरू कर दी है और अब तक 3700 रजिस्ट्रियों में पैन गड़बड़ी पाई गई, जिनमें से 2900 में सुधार किया जा चुका है।

आयकर सूत्रों के अनुसार, यह सर्वे जोन-3 (सिविल लाइंस) पर केंद्रित था, लेकिन अन्य जोन (जैसे जोन-1 और जोन-2) में भी समान गड़बड़ियां मिलने की आशंका है। विभाग ने संदिग्ध व्यक्तियों को नोटिस जारी किए हैं और 10 दिनों के अंदर जवाब मांगा है। जांच में बड़े बिल्डर, दलाल और कुछ सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

कानपुर में बढ़ते टैक्स घोटाले

यह मामला कानपुर में हाल के महीनों में आयकर विभाग की कई बड़ी कार्रवाइयों का हिस्सा है। इससे पहले भी रजिस्ट्री कार्यालयों में स्टांप शुल्क चोरी के मामले सामने आए थे, जहां 1000-2500 करोड़ की गड़बड़ियां पकड़ी गईं। यह उत्तर प्रदेश सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत भ्रष्टाचार पर सख्ती का संकेत है।

आयकर विभाग का कहना है कि जांच जारी है और आगे और बड़े खुलासे हो सकते हैं। पीड़ित खरीदारों और विक्रेताओं को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी रजिस्ट्री दस्तावेजों की जांच करवाएं और किसी भी संदिग्ध लेन-देन से बचें। यह घटना संपत्ति रजिस्ट्री में पारदर्शिता की जरूरत को फिर से उजागर करती है।

INPUT-ANANYA MISHRA

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