ममता कुलकर्णी की किन्नर अखाड़े से छुट्टी! किन्नर अखाड़े ने ममता से तोड़ा नाता

किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी महामंडलेश्वर बनाई गईं ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। एक वीडियो जारी कर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने इसकी जानकारी दी। कहा कि लगातार विवादित बयानों के चलते अखाड़े ने उनको बाहर करने का फैसला किया है। अब ममता कुलकर्णी अखाड़े की सदस्य नहीं हैं। उनका हमारे अखाड़े से कोई वास्ता नहीं है।शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर लक्ष्मी नारायण ने कहा कि वह इस विवाद में नहीं पड़ना चाहती हैं कि कौन सही है या कौन गलत है। माघ मेले में ब्राह्मण बटुकों की चोटी पकड़कर जिस तरह घसीटा गया इससे वह बहुत नाराज हैं। प्रशासन को मामले को जिस तरह से हैंडल करना चाहिए था नहीं किया गया। सनातन धर्म की खिल्ली नहीं उड़नी चाहिए। कोई किसी परंपरा पर अंगुली उठाता है तो बहुत कष्ट होता है।

महामंडलेश्वर डॉ.लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने वीडियो जारी कर क्या कहा

किन्नर अखाड़ा से महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी को बाहर कर दिया गया है। इसकी पुष्टि अखाड़े की प्रमुख महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने वीडियो जारी कर कहा अखाड़े के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद यह साफ़ फैसला लिया गया है कि अब ममता कुलकर्णी का अखाड़े से कोई लेना-देना नहीं रहेगा। वह न तो अखाड़े की किसी पदाधिकारी हैं और न ही उसकी सदस्य। हमारे अखाड़े में महिलाएं, पुरुष और किन्नर—तीनों वर्गों की समान भागीदारी है और हम किसी भी प्रकार के विवाद या टकराव से दूर रहना चाहते हैं। साथ ही, मौनी अमावस्या के दिन जिस तरह से बटुक ब्राह्मणों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें शिखा पकड़कर पीटा गया, उस घटना को लेकर अखाड़े में गहरी नाराजगी है। ऐसी घटनाएं स्वीकार्य नहीं हैं और समाज में गलत संदेश देती हैं।

Also read:यूपी में एक के बाद एक इस्तीफा का सिलसिला जारी! योगी के राज में अब इस अधिकारी ने दे दिया इस्तीफा

ममता कुलकर्णी ने क्या कहा था

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद में किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी ने बयान दिया था। ममता कुलकर्णी ने कहा था कि केवल वस्त्र पहन लेने या पद पा लेने से कोई संत नहीं बन जाता। आज 10 में से 9 महामंडलेश्वर झूठे हैं।
ममता कुलकर्णी ने दो सवाल भी पूछे थे? पहला उन्हें शंकराचार्य नियुक्त किसने किया और दूसरा, करोड़ों लोगों की भीड़ में पालकी ले जाने की क्या जरूरत थी? ममता कुलकर्णी ने आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की वजह से उनके शिष्यों की पिटाई हुई है। अगर वह पालकी से न जाकर पैदल चले जाते तो ऐसा कुछ भी नहीं होता। लेकिन, वह जिद पर अड़े रहे। यह गुरु का आचरण नहीं होता है। गुरु का आचरण जिम्मेदारी और सौम्यता से भरा हुआ होता है।

10 में से 9 महामंडलेश्वर झूठे!

उन्होंने कहा कहा था, ‘मैंने अपने आध्यात्मिक सफर में बहुत कम सच्चे संत देखे हैं। दस में से नौ लोग ऐसे मिले, जो झूठे थे और केवल पद और पहचान के पीछे भाग रहे थे। इसी अनुभव के चलते मुझे अब महामंडलेश्वर का पद एक हास्य विनोद जैसा लगने लगा है। जब हर दूसरे दिन नए महामंडलेश्वर बनाए जा रहे हों, तो ऐसे में पदों की गंभीरता अपने आप खत्म हो जाती है।’

INPUT-ANANYA MISHRA

(देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं.)