UP दरोगा भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ विकल्प पर सियासत तेज, जांच के बावजूद अब तक नहीं हुई कार्रवाई

लखनऊ: उत्तर प्रदेश दरोगा भर्ती परीक्षा में ‘अवसरवादी’ के लिए उत्तर विकल्प के रूप में ‘पंडित’ शब्द दिए जाने को लेकर सियासत गरमा गई है। इस सवाल के सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार और भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जबकि सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड को पूरी परीक्षा प्रक्रिया की जांच करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, जांच के निर्देश के बाद भी अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे सवाल उठने लगे हैं कि आखिर जिम्मेदारों पर कब कार्रवाई होगी।

भर्ती बोर्ड से जुड़े पूर्व अधिकारियों और जानकारों का कहना है कि इस मामले में किसी बड़े एक्शन की संभावना कम ही दिख रही है। उनका मानना है कि न तो परीक्षा कराने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और न ही इसे आपराधिक मामला माना जाएगा। ऐसे में परीक्षा का परिणाम भी तय समय पर जारी होने की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी जांच की प्रक्रिया कई स्तरों से होकर गुजरती है, लेकिन इसके बावजूद इस तरह की गलती का सामने आना सिस्टम की गंभीर चूक को दर्शाता है। यही वजह है कि अब इस पूरे मामले में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है।

विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि यह केवल एक टाइपिंग या तकनीकी गलती नहीं हो सकती, बल्कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया की गंभीर लापरवाही का परिणाम है। विपक्ष का आरोप है कि यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं की गई तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।

फिलहाल सभी की नजरें पुलिस भर्ती बोर्ड की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। देखना होगा कि जांच के बाद इस मामले में किसी पर कार्रवाई होती है या नहीं, या फिर यह विवाद सिर्फ सियासी बहस बनकर ही रह जाएगा।

INPUT-ANANYA MISHRA

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